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धन्वंतरी पतंजलि योग संस्थान : राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हुआ विस्तार।

दरोगा देव यादव उत्तर प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बने सदस्य।

धन्वंतरी पतंजलि योग संस्थान : राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हुआ विस्तार। दरोगा देव यादव उत्तर प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बने सदस्य।

धन्वंतरी पतंजलि योग संस्थान : धन्वंतरी पतंजलि योग संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का विस्तार किया गया, जिसमें संस्थान की चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) निवासी संस्थापक सदस्य एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य व उप्र महिला प्रभारी एवम सह प्रभारी पूजा त्रिपाठी व निशा त्रिपाठी, राष्ट्रीय महिला सह प्रभारी दीपाली डंगवाल ने मिलकर लगातार संस्थान में लोगो को जोड़कर संस्थान को उद्देश्य के प्रति कार्य करने के लोगो को प्रेरित कर रही है।

मीडिया प्रभारी संदीप मदेशिया ने सूचना देकर बताया कि ऑनलाइन ज़ूम मीटिंग के माध्यम से संस्थान के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक योग गुरु आचार्य अजय पाठक महाराज के मार्गदर्शन में उक्त कार्यकारिणी विस्तार किया गया। जिसमें धन्वंतरी पतंजलि योग समिति संस्थान के राष्ट्रीय/केंद्रीय सह प्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश के विपिन मिश्रा,

राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य एवं उत्तर प्रदेश का प्रभारी दरोग़ा देव यादव, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उत्तराखंड की प्रिया भंडारी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रदेश महिला सह प्रभारी उत्तराखंड अनुराधा भट्ट, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अदिति मिश्रा को बनाया गया।

लगातार संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने संस्थान के मूल उद्देश्य के पूर्ति के योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, एक्युप्रेशर चिकित्सा पद्धति एवं जनकल्याण के आम जन मानस को समाज एवं स्वास्थ्य के प्रति विभिन्न जिले, प्रदेशों के साथ के साथ इंटरनेशनल लेवल पर धन्वंतरी पतंजलि संस्थान के लोगो के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।

संस्थान की इकाई विभिन्न प्रदेशों में जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, नोएडा-दिल्ली, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड में लोगो जन जागरूकता के माध्यम से लोक कल्याण का कार्य कर रही है।

संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक का कहना है कि संस्थान स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ ऋषि परम्परा और अपनी मूल परम्परा को जीवित रखने के लिए सोनभद्र गुरुकुल शिक्षा पद्धति की स्थापना करना चाहते है, जिससे भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता सदैव जीवित रहे।

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