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एनटीपीसी सुरक्षा गार्डों को कोटा बस्ती ग्रामीणों का झेलना पड़ा गुस्सा।

एनटीपीसी सुरक्षा गार्डों को कोटा बस्ती ग्रामीणों का झेलना पड़ा गुस्सा। एनटीपीसी सुरक्षा गार्ड बिना किसी पूर्व सूचना के कोटा बस्ती गांव में ग्रामीणों को घर खाली कराने का अल्टीमेटम देने पहुंचे थे। लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण सुरक्षा गार्ड बैरंग वापस लौटे।

प्राप्त जानकारी अनुसार कोटा बस्ती गांव में रविवार सुबह 10:00 बजे एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा दर्जनभर संविदा सुरक्षा गार्डों को भेज कर अपने खाली पड़े बंद आवासों को चिन्हित करने के लिए भेजा था। गांव में एनटीपीसी गार्डों के आने की सूचना मिलने पर ग्रामीण एकत्रित होने लगे और पूरी कार्रवाई का जोर शोर से विरोध करने लगे। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए सुरक्षा गार्ड वापस लौट गए।

एनटीपीसी सुरक्षा गार्डों को कोटा बस्ती ग्रामीणों का झेलना पड़ा गुस्सा।
Photo : Mahamana News

ग्राम प्रधान प्रमोद तिवारी और समाजसेवी आशीष चौबे ने बताया कि बिना किसी पूर्व सूचना के एनटीपीसी संविदा सुरक्षा गार्डों ने गांव में आकर ग्रामीणों को घर व जमीन खाली करने के लिए धमकाया। ‌जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सुरक्षा गार्डों का जमकर विरोध किया और सुरक्षा गार्ड वापस लौट गए।

कोटा बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि लगभग चार दशकों से वह इस भूमि पर काबिज हैं और एनटीपीसी पावर प्लांट में ही मजदूरी कर अपना जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं। अब एनटीपीसी पावर प्लांट तीसरे चरण के विस्तार को लेकर हमें बिना कोई राहत दिए बेघर करने की फिराक में है।

एनटीपीसी सिंगरौली पावर प्लांट के तीसरे चरण के विस्तार के क्रम में 800 मेगा वाट की दो यूनिटों का निर्माण होना है। जिसके लिए एनटीपीसी प्लांट के आसपास अपने भूखंडों पर काबिज मकान व दुकान को खाली कराना चाहती है। पिछले लगभग 6 महीने से विभिन्न माध्यमों से एनटीपीसी ग्रामीणों को घर खाली करने की सूचना दे रही है। जिसको लेकर कई बार जिला प्रशासनिक अधिकारियों की भी बैठक हो चुकी है। परंतु चार दशकों को से भी अधिक समय से काबिज मजदूर बेदखल होने से पहले अपने लिए पुनर्स्थापना की मांग पर अड़े हुए हैं।

एनटीपीसी सिंगरौली जनसंपर्क अधिकारी रिंकी गुप्ता ने बताया कि रूटीन कार्रवाई के तहत सुरक्षा गार्ड कोटा बस्ती में एनटीपीसी द्वारा निर्मित आवासों को चिन्हित करने के लिए गए थे। यह एक सतत प्रक्रिया है जो हर कुछ महीने बाद अपनाई जाती है, जिससे पता चल सके कि खाली आवासों पर कहीं अतिक्रमण तो नहीं हो रहा है। ग्रामीणों के विरोध की कोई सूचना नहीं है।

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