उत्तर प्रदेशसोनभद्र

एनटीपीसी प्लांट विस्तार, बेदखली के खिलाफ लामबंद ग्रामीणों की बैठक।

Villagers' meeting mobilized against NTPC plant expansion, eviction.

एनटीपीसी प्लांट विस्तार, बेदखली के खिलाफ लामबंद ग्रामीणों की बैठक। एनटीपीसी सिंगरौली पावर प्लांट के तीसरे चरण के विस्तार के क्रम में 800 मेगा वाट के दो यूनिट का निर्माण होना है। जिसके लिए एनटीपीसी अपनी जमीनों पर दशकों से बसी बस्तियों को हटाने की मुहिम में लगा हुआ है। बेदखली की नोटिस मिलने के बाद बड़ी आबादी में एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।

सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ज्वालामुखी कॉलोनी, भवानी नगर, प्रेम नगर और कोटा बस्ती के कुछ हिस्सों में बेदखली की प्रक्रिया बनाकर जमीनों को खाली कराने का निर्देश दिया जा रहा है। जिससे नाराज कोटा बस्ती के ग्रामीणों ने पंचायत भवन पर बैठक कर एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ लामबंद होने का फैसला किया।

एनटीपीसी प्लांट विस्तार, बेदखली के खिलाफ लामबंद ग्रामीणों की बैठक।
फोटो : महामना न्यूज़।

कुछ दिन पूर्व दुद्धी तहसीलदार, थानाध्यक्ष शक्तिनगर‌ और एनटीपीसी भू-संपदा अधिकारी एनटीपीसी शक्तिनगर सुरक्षाकर्मियों के भारी लाव लश्कर के साथ कोटा बस्ती में भ्रमण कर ग्रामीणों को निर्देशित किया कि बेदखली से पूर्व ही अपने लिए कोई और आशियाना बना लें।

एनटीपीसी पावर प्लांट शक्तिनगर के निर्माण के समय 1978 से पाई-पाई जोड़ कर अपना आशियाना बनाए गरीब मजदूरों को अब एनटीपीसी प्लांट विस्तार के कारण बेदखली की डर सता रही है। जिन्होंने अपना पूरा जीवन एनटीपीसी प्लांट के निर्माण व प्लांट में कार्य करते हुए बिता दिया, उन्हें ही आज प्लांट विस्तार के नाम पर बेघर होने का गम खाए जा रहा है।

एनटीपीसी प्लांट विस्तार, बेदखली के खिलाफ लामबंद ग्रामीणों की बैठक।
फोटो : महामना न्यूज़।

कोटा ग्राम प्रधान प्रमोद तिवारी, समाजसेवी आशीष चौबे, चंदन सिंह, छठी लाल केसरवानी, शिवम चौबे, सुमित कुमार आदि सहित तकरीबन तीन सौ ग्रामीणों ने कोटा ग्राम पंचायत पर बैठककर एनटीपीसी प्रबंधन से निपटने की रणनीति पर विचार किया। ग्रामीणों ने कहा कि एनटीपीसी तब कहां थी, जब हम सभी अपना आशियाना बना रहे थे। ‌जंगल और गड्ढों को अपनी मेहनत से रहने लायक बनाया। लगभग चार दशकों से हम सभी यही निवासरत हैं और प्लांट में ही कार्य करके अपनी आजीविका चलाते हैं।

बैठक के बीच ग्रामीणों ने कहा कि पावर प्लांट के विस्तार का विरोध हम नहीं कर रहे हैं, प्लांट का विस्तार बेशक हो लेकिन पहले हम सभी को पुनर्स्थापित किया जाए। हम सभी ने एनटीपीसी शक्तिनगर पावर प्लांट के निर्माण के समय से लेकर अब तक अपनी सेवाएं दी हैं और अब उम्र के इस पड़ाव पर इस तरह हमें बेघर ना किया जाए।

सोनभद्र जिला प्रशासन और एनटीपीसी शक्तिनगर प्रबंधन यदि बीच का कोई रास्ता नहीं निकलता है तो बेदखली के दौरान ग्रामीणों से टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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