FEATUREDसिंगरौली

विकास की बाट जोहता एनसीएल का विस्थापित गांव।

Displaced village of NCL waiting for development.

विकास की बाट जोहता एनसीएल का विस्थापित गांव।एनसीएल द्वारा पुनर्वास बस्तियों में लाख विकास के दावे करने के बावजूद भी विस्थापित बस्तियों का हाल मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बेहाल है। विस्थापितों की जमीनों पर आबाद एनसीएल की कालोनियों की चकाचौंध देखकर मूल विस्थापित अपने को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

शाम ढलते ही कूप अंधेरे में डूबे विस्थापित गांव एनसीएल के विकास के दावों की पोल खोलते हैं। विस्थापित गांव में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। शुद्ध पेयजल समस्या, जर्जर सड़क, टूटी नालियां, स्वास्थ्य चिकित्सा का अभाव आदि कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो एनसीएल की सभी परियोजनाओं के विस्थापित गांव में देखी जा सकती हैं।

अपनी जमीनों को कोयला खदानों के लिए देने के बाद विस्थापित हुए ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। रेहटा, बांसी, कोहरौलिया, खड़िया, आंबेडकर नगर, जैतपुर, नंद गांव, चोकरा आदि एनसीएल की विस्थापित बस्तियों में भ्रमण करने पर पाएंगे कि पेयजल, स्ट्रीट लाइट, नाली और सड़क जैसी सुविधाएं नदारद हैं, या यूं कहें कि एक बार नाली और सड़क निर्माण करा देने के बाद विस्थापित गांव को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।

शुद्ध हवा को तरस रहे विस्थापितों गांव –

एनसीएल कि विस्थापित बस्तियों के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी तरह जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन अब तो शुद्ध हवा के लिए भी बेबस हैं। कोयला खदानों से उड़ने वाली धूल और कोयला परिवहन के कारण लोगों की सांसो में कोयला जहर के रूप में धुल रहा है। कोयले की उड़ती धूल और प्रदूषण के कारण ग्रामीणों का जीवन शुद्ध हवा के अभाव में दम तोड़ रहा है।

कोयला परिवहन की गाड़ियों से आए दिन लगता है जाम –

एनसीएल से कोयला परिवहन कर रही गाड़ियों के कारण क्षेत्र में आए दिन भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मुख्य मार्गों पर ट्रक-ट्रेलर को आड़े तिरछे खड़ी कर कोयला लोडिंग का नंबर लगाने के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। आए दिन लगने वाले जाम के झाम में पीसकर लोग परेशान हो रहे हैं। मुख्य मार्गों के दोनों किनारे गाड़ियां खड़ी करने के कारण भीषण जाम लग रहा है। शक्तिनगर जयंत मुख्य मार्ग, जयंत मोरवा मुख्य मार्ग, शुक्ला मोड़, गोरबी मुख्य मार्ग आदि जगहों पर एनसीएल की कोयला परिवहन की ट्रकों के कारण जाम लगना आम बात है।

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