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भारत अब सोया हुआ या शांत शेर नहीं बल्कि समर्थ शक्तिशाली दहाड़ता हुआ शेर है।

India is no longer a sleeping or a calm lion, but a powerful, roaring lion.

भारत अब सोया हुआ या शांत शेर नहीं बल्कि समर्थ शक्तिशाली दहाड़ता हुआ शेर है। भारतीय संसद के नवीन भवन के निर्माण की प्रक्रिया अभी जारी है और इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिसर में विशालकाय नवीन अशोक स्तंभ का लोकार्पण किया गया। अब इसके माध्यम से वह लोग सक्रिय नजर आने लगे हैं। जो किसी भी तरह से मोदी और भाजपा को नाहक ही गरियाने का अवसर नहीं छोड़ते।

भारत अब सोया हुआ या शांत शेर नहीं बल्कि समर्थ शक्तिशाली दहाड़ता हुआ शेर है।
Photo : Google

सम्राट अशोक के दौर में जो मूल स्तंभ बनाया गया था उसके प्रतीक स्वरूप को भारत के तमाम शासकीय दस्तावेजों व अन्य कई स्थानों पर राजकीय प्रतीक के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। मोदी विरोधियों का कहना हैं कि राजकीय प्रतीक में चारों शेर शांत भाव से खड़े दिखाए जाते रहे हैं जबकि नवीन संसद भवन प्रांगण में लोकार्पित अशोक स्तंभ में चारों शेर अपना मुँह खोल कर आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। इस बिंदु को लेकर मोदी विरोधी तमाम तरह के तर्क – कुतर्क करते नजर आने लगे हैं। उनका मानना है कि “बौद्धकाल तलवार से नहीं करुणा और तर्क से विस्तार लेता है और सारी दुनिया को अपनी गोद में ले लेता है।”

ऐसे सभी लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि म्यानमार में बौद्ध धर्म बहुप्रचारित व बहुस्वीकार्य है और लगभग अधिकाँश लोग वहाँ बौद्ध धर्म मानते हैं। ऐसे में फिर क्या वजह बनी की वहाँ बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु को भगवान बुद्ध के पथ पर चलते हुए शांति और सौहार्द्र का संदेश देने के बजाय आत्मरक्षा और राष्ट्र रक्षा के लिए हथियार और हिंसा का सहारा लेना पड़ा ? वजह सिर्फ एक ही है, जो बौद्ध धर्म की स्थापना से भी जाने कितने समय पूर्व से सनातन धर्म ग्रंथों में दर्ज है। यही कि ” धर्मो रक्षति रक्षितः“।

भारत अब सोया हुआ या शांत शेर नहीं बल्कि समर्थ शक्तिशाली दहाड़ता हुआ शेर है।
Photo : Mahamana News

आज मोदी विरोधी अगर भारत का इतिहास ही थोड़ा खंगाले तो उन्हें स्पष्ट समझ आ सकता है कि भारत की भौगोलिक सीमाएं जो आज है। वह आज से डेढ़ सौ – दो सौ वर्ष पहले या उससे भी अधिक समय पूर्व कहाँ तक थी। वह अच्छे से जान और समझ सकते हैं और साथ ही यह भी जान और समझ सकते हैं कि भौगोलिक सीमाओं के संकुचन की वजह क्या थी। क्या ? वह भूल गए हैं कि भारत में ही भारत विरोधी तत्व कहाँ और कितनी तरह से आज भी सक्रिय हैं और वह लोग लगातार “भारत की आत्माहिंदुत्व या कहें हिंदू जीवन पद्धति पर लगातार कठोर से कठोर प्रहार करने में नहीं चूक रहे हैं।

यह जगजाहिर है कि “जहाँ-जहाँ से हिंदू घटा है, वहीं-वहीं से देश बँटा है“, फिर चाहे वह अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बर्मा, बांग्लादेश या और भी कोई हिस्सा, जो पहले भारत में रहा था। वहाँ हिंदू जीवन पद्धति का ह्रास ही भारतीय भौगोलिक सीमाओं के संकुचन का कारण बना है।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत, भारतीय जीवन पद्धति को लेकर नवजागरण और उत्साह का संचार बहुत ही तीव्र गति से हुआ है। यह हम सब तब भी महसूस करते हैं, जब श्री नरेंद्र मोदी भारत को छोड़ विश्व के किसी भी देश में जब जाते हैं तो वहाँ बसे भारतीयों का उत्साह देखने काबिल होता है। भारत के कुछेक मोदी विरोधियों को छोड़ विश्व के शेष सभी भारतीय और भारतीय मूल के नागरिक फिर भले ही उनके पूर्वज यहाँ से कई दशकों पहले ही क्यों ना चले गए हो। उनका भारत के प्रति एक विशेष लगाव स्पष्ट मालूम होता है।

आज भारत पर कोई आक्रमण करें यह तो बहुत दूर की कौड़ी है, अब भारत की ओर आँख दिखाने वाली ताकतों को भी सौ बार सोचना पड़ रहा है तो उसके पीछे अगर कोई एक कारण है तो वह है भारत का सशक्त और समर्थ नेतृत्व। जो आज हमारे सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में है।

आज भारत वह भारत नहीं रहा जब कोई शत्रु, भारतीय सैनिकों के सिर काटकर भारत में पहुँचाए या हमारे ही घर में घुसकर हमें मारे। पिछले लगभग एक दशक में भारत बहुत ताकतवर स्थिति में आ चुका है और दुनिया देख भी चुकी है कि वह दुश्मनों को घर के भीतर घुसकर नेस्तनाबूद ही नहीं करता बल्कि वहां से पूर्ण सुरक्षित रूप से लौटता भी है। आज भारत का सैनिक अगर गलती से भी परदेश की सीमा में चला जाता है तो उसे पूरी तरह सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उसी देश की होती है और उसे ऐसा करना भी पड़ता है अन्यथा उसके दुष्परिणामों से वह नहीं बचेगा यह भी उसे अच्छे से पता है।

आज भारतीय नेतृत्व ने वह स्थिति ला दी है कि अब भारत रूपी शेर अपने अस्तित्व और रक्षा के लिए शांत नहीं बैठता बल्कि दहाड़ता भी है और बहुत जोरदार दहाड़ता है। नरेंद्र मोदी के रूप में भारतीय नेतृत्व और व्यवस्था अब न केवल देश के अंदरूनी छुपे हुए दुश्मनों से पूरी तरह निपटा रही है बल्कि वैश्विक पटल पर भी यह संदेश बहुत पहले ही जा चुका है कि भारत अब सोया हुआ या शांत शेर नहीं बल्कि वह समर्थ शक्तिशाली दहाड़ता हुआ शेर भी समय की मांग अनुसार बन सकता है और अगर यह बात प्रतीक रूप में भारत की केंद्रीय सर्वोच्च संस्था, संसद के निर्माणाधीन परिसर में स्थापित होती है तो इसका सीधा-सीधा संदेश संपूर्ण विश्व को जाता है कि सम्राट अशोक के समय बना अशोक स्तंभ हो सकता है कि उस समय की देश काल परिस्थिति के अनुरूप हो लेकिन आज जरूरत भारत की पहचान जिस रूप में विश्व को करवाई जानी चाहिए।

वह हमारे सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अशोक स्तंभ के रूप में लोकार्पित कर बहुत ही स्पष्ट तरीके से जतला दिया है। अब इस बात को लेकर अगर देश विरोधी ताकतें और मोदी विरोधी अगर अपने कपड़े फाड़ते हैं तो बेशक फाड़ते रहें और अगर उन्हें फाड़ने में दिक्कत होती है तो वो मोदी समर्थको से मदद ले सकते हैं क्योंकि देश विरोधियों और मोदी विरोधियों को छीलने का आनन्द अवर्णनीय ही है।

✒️ #अंबरीषभावसार
साभारअंबरीष भावसार जी के फेसबुक वॉल से साझा पोस्ट। इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं। किसी भी तथ्य की महामना न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है।

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