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आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य – पर्वतारोही पद्मश्री डॉ संतोष यादव।

It is our moral duty to provide healthy ecosystem to the coming generation - Mountaineer Padmashree Dr. Santosh Yadav.

आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य – पर्वतारोही पद्मश्री डॉ संतोष यादव। भारतीय स्वतंत्रता के गौरवशाली 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की स्मृति में बीएचयू राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा 75 पौधे लगाए गए और लगे हुए पौधों में स्वयंसेवकों द्वारा जल डाला गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। जिसका विषय “प्रकृति के साथ सद्भाव में सुरक्षित मानव जीवन” रहा।

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना के विभिन्न इकाइयों के द्वारा वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य - पर्वतारोही पद्मश्री डॉ संतोष यादव।

मुख्य समारोह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय परिसर में आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि प्रोफेसर ध्रुव कुमार, अध्यक्ष, शिक्षा विभाग, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, कार्यक्रम समन्वयक डॉ बाला लखेंद्र, कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुतापा दास, डॉ कृष्णानंद सिंह द्वारा पौधारोपण किया गया। भारतीय स्वतंत्रता के गौरवशाली 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की स्मृति में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा 75 पौधे लगाए गए और लगे हुए पौधों में स्वयंसेवकों द्वारा जल डाला गया।

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इस अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसका विषयप्रकृति के साथ सद्भाव में सुरक्षित मानव जीवन रहा। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस के लिए जो मूल थीम रखा गया है वह है केवल एक पृथ्वी। संगोष्ठी का उद्घाटन माउंट एवरेस्ट पर दो बार फतेह करने वाली विश्व की पहली महिला पद्मश्री डॉ संतोष यादव ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि प्रकृति की रक्षा के लिए प्राकृतिक संसाधनों का समुचित प्रयोग करें और अपने आसपास अधिक से अधिक पौधा लगाएं तथा पानी के दुरुपयोग को रोकते हुए वर्षा जल के संचयन के लिए कार्य करें।

आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य - पर्वतारोही पद्मश्री डॉ संतोष यादव।

उन्होंने प्रकृति के समक्ष उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों की चर्चा की और युवाओं का आह्वान किया कि वह प्राथमिकता के आधार पर प्रकृति के संरक्षण हेतु वृक्षारोपण, जल संरक्षण, वन संरक्षण, प्रकृति में पाए जाने वाले विविध पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण हेतु कार्य में एकजुट होकर एक दूसरे का हाथ बटाएं जिससे हम अपनी पृथ्वी को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या की चर्चा करते हुए कहा कि यह समस्या मानव जाति द्वारा ही उत्पन्न की गई है जिसके लिए हमारा जीवन शैली, भौतिकवादी जिंदगी और लापरवाह व्यवहार मूल कारण है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ विक्रम सिंह ने युवा और नेचुरोपैथी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला और कहा कि प्रकृति की रक्षा हेतु हमें नेचुरोपैथी की ओर लौटना पड़ेगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय नाद योग आचार्य डॉ नवदीप जोशी ने कहा कि यदि समय रहते मानव समुदाय प्रकृति के संतुलन के लिए एकजुट होकर कार्य आरंभ नहीं किया तो हमारा जीवन संकट पूर्ण हो जाएगा। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर ध्रुव कुमार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने हेतु युवाओं को जिम्मेदार और संवेदनशील बनाने की बात की।

इस अवसर पर योगाचार्य रितेश दुबे, प्रोफेसर प्रणव कुमार, डॉ एन के विश्वकर्मा, डॉ शाहनवाज आलम, डॉ श्रीनिवासन के अय्यर, डॉ रंजीत कुमार सिंह, डॉ श्रवण कुमार, डॉ विजय लक्ष्मी गुप्ता, डॉ सच्चिदानंद मिश्रा, डॉ अंजना त्रिपाठी, डॉ रविंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक वक्ताओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए । आरंभ में अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम समन्वयक डॉ बाला लखेंद्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन योगाचार्य श्री रितेश दुबे ने किया।

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