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National Herald Case : राहुल गांधी की बढीं मुश्किलें? जानें पूरा मामला क्या है नेशनल हेराल्ड और किसने दर्ज कराया था मामला ?

National Herald Case: More troubles for Rahul Gandhi? Know what is the whole matter National Herald and who had filed the case?

National Herald Case : नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता (Congress Leader) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ जारी है। प्रवर्तन निदेशालय ने राहुल गांधी से सोमवार को करीब 10 घंटे की पूछताछ की थी। रात तकरीबन 11:00 बजे ईडी दफ्तर से घर के लिए राहुल गांधी रवाना हुए। पूछताछ के दौरान यूपी दफ्तर के बाहर कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंगलवार को दूसरे दिन की पूछताछ से पहले कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) अपने भाई राहुल गांधी से मिलने उनके आवास पर पहुंची।

नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ जारी है और आज मंगलवार को भी राहुल गांधी ईडी के सामने पेश होंगे। तमाम प्रकरण पर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार (Modi Government) पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी की बुलंद आवाज से केंद्र सरकार डर गई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार राहुल गांधी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंच चुके हैं।

 

कबीर के दोहे के जरिए राहुल ने मोदी सरकार पर साधा निशाना- ईडी दफ्तर के लिए निकलने से पहले राहुल गांधी ने कबीर के दोहे के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि “सांच बराबरि तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदै सांच है, ताके हिरदै आप।।” समाज को समानता, सेवा, आपसी सौहार्द्र और प्रेम का पाठ पढ़ाने वाले संत कबीर दास जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।

National Herald Case : राहुल गांधी की बढीं मुश्किलें? जानें पूरा मामला क्या है नेशनल हेराल्ड और किसने दर्ज कराया था मामला ?

नेशनल हेराल्ड क्या है ?

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड (AJL) का गठन किया था। जिसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। उस समय एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड के अंतर्गत अंग्रेजी भाषा में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एजेएल का गठन किया था लेकिन उस पर मालिकाना हक, कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सहायता कर रहे थे और इसके शेयर होल्डर भी वही थे। 90 के दशक में यह अखबार मुनाफा दे पाने में असक्षम साबित हुए। एक आंकड़ा के अनुसार साल 2008 तक एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड पर 90 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज बकाया था। ‌ तब एजेएल समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद कर दिया और प्रॉपर्टी बिजनेस में उतर गई।

जानें नेशनल हेराल्ड विवाद की शुरुआत-

2010 में एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड के 1057 शेयरधारक थे। घाटा होने पर एजेएल (AJL) की होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) को ट्रांसफर कर दी गई। यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना 2010 में ही की गई थी। जिसमें कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में कुल 76% की हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी माता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के पास रखी गई। बाकी 24 फ़ीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास रखी गई थी।

AJL के शेयर YIL को ट्रांसफर होते ही पुराने शेयर होल्डर्स नजर आने लगे। पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब यंग इंडिया लिमिटेड ने एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड का अधिग्रहण किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड का शेयर शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्ज कराया था नेशनल हेराल्ड मामला-

भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के दिग्गज वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। उस समय केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी। दर्ज कराए मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया कि यंग इंडिया लिमिटेड ने 2000 करोड रुपए से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए फर्जी तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को अधिग्रहित किया।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि महंगाई से हो रही जनता की बदहाली पर राहुल गांधी ने लगातार सरकार को घेरा है और सरकार के पास इसका जवाब नहीं इसलिए सरकार को राहुल गांधी से परेशानी है।

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