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360 डिग्री घूमने वाले अनोखे और चमत्कारी शिवलिंग के बारे में जानें।

दुनिया का एकमात्र अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग जो चारों दिशाओं में 360 डिग्री घूमता है।

360 डिग्री घूमने वाले अनोखे और चमत्कारी शिवलिंग के बारे में जानें। दुनिया का एकमात्र अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग जो चारों दिशाओं में 360 डिग्री घूमता है। हम सभी ने एक से बढ़कर एक चमत्कारी और अनोखे धार्मिक तीर्थ स्थानों के बारे में पढ़ते एवं सुनते आ रहे हैं। आपने आज तक एक से बढकर एक अनोखे शिवलिंग देखे होंगे, लेकिन क्या कभी ऐसा शिवलिंग देखा है जो चारों दिशाओं में घूमता हो। जी हां, इस दुनिया में एकमात्र ऐसा चमत्कारी शिवलिंग भी है जो चारों दिशाओं में घूमता है।

दुनिया का एकमात्र अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग जो चारों दिशाओं में 360 डिग्री घूमता है।

ज्यादातर शिवलिंगों की जलहरी का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा की तरफ होता है। मध्यप्रदेश राज्य के श्योपुर जिले में गोविंदेश्वर महादेव शिवालय में दुनिया का सबसे अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग स्थापित है जो चारों दिशाओं में घूमता है। इस शिवलिंग को भक्त अपनी सुविधानुसार किसी भी दिशा में घुमाकर पूजा कर सकते हैं।

360 डिग्री चारों दिशाओं में घूमने वाला अद्भुत और चमत्कारी शिवलिंग श्योपुर जिले के छार बाग मोहल्ले में अष्ट फलक की छतरी में स्थित है। इसका निर्माण इस तरह से किया गया है कि यह अपनी धुरी पर चारों दिशाओं में घूमता है। पूजा करने वाले भक्त अपनी इच्छानुसार शिवलिंग को किसी भी दिशा में घुमा कर पूजा कर सकते हैं।

360 डिग्री घूमने वाला चारों दिशाओं में घूमने वाले इस अनोखे शिवलिंग का इतिहास भी बहुत पुराना है। इसका निर्माण श्योपुर के गौड़ वंश के राजा पुरूषोत्तम दास ने 294 वर्ष पूर्व करवाया था। इस मंदिर में लगे शिलालेख में इसके निर्माण का समय बताया हुआ है।

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित 360 डिग्री घूमने वाला शिवलिंग मंदिर को गोविंदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। हालांकि इससे पहले यह शिवलिंग महाराष्ट्र के सोलापुर में बाम्बेश्वर महादेव के रूप में स्थापित थे। गौड़ राजा भगवान शिव के परम भक्त थे। इसी कारण से उन्होंने शिवनगरी के रूप में श्योपुर नगर को बसाया था।

360 डिग्री घूमने वाला चमत्कारी अनोखा शिवलिंग लाल पत्थर बना है। इसके दो भाग हैं, जिनमें एक पिंड है और दूसरा दूसरा जलहरी। यह शिवलिंग एक धूरी पर स्थापित है जिसकी वजह से चारों दिशाओं में घूमता है।

ऐसी मान्यता है कि साल में एक बार रात के समय इस शिवालय की घंटिया अपने आप बजने लगती हैं। आरती के बाद शिवलिंग अपने आप घूमने लगता है। आसपास के लोग बताते हैं कि इस शिवलिंग का मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रहता है लेकिन अपने आप ही यह उत्तर या पूर्वमुखी हो जाता है।

इस शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि इसकी पूजा करने से सारे कष्टों, सर्पदोष, पितृदोष और गृहक्लेश आदि से तुरंत निदान मिलता है। 360 डिग्री चारों दिशाओं में घूमने वाला अदभुत अनोखे शिवलिंग की पूजा करने से मन्नत पूरी होती है।

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