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काउंट डाउन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत एनएसएस बीएचयू का द्वितीय साप्ताहिक योग शिविर का शुभारंभ।

योग दुनिया को भारतीय जीवन पद्धति का एक अनुपम भेंट है, जो स्वस्थ जीवन के मार्ग को प्रशस्त करता है। योग आत्मज्ञान की प्राप्ति तथा सभी प्रकार की शारीरिक परेशानियों को दूर करने का एक विज्ञान आधारित क्रिया है। योग मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता को परिमार्जित कर आत्मज्ञान के माध्यम से आत्म साक्षात्कार करवाता है। उक्त बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर विजय कुमार शुक्ला ने राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित द्वितीय साप्ताहिक योग प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन समारोह में शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि योग पूर्णतः वैज्ञानिक शोध और तथ्यों पर आधारित है। योग के द्वारा कई असाध्य रोगों का इलाज संभव है, जिसके लिए हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा योगसूत्र प्रतिपादित किए गए हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए भारत सरकार युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के सहायक कार्यक्रम सलाहकार डॉ कमल कुमार कर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से हमने दुनिया भर के देशों को योग के विविध पक्षों से परिचित कराया है और बड़ी संख्या में लोग योग शिविरों में भाग लेकर स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि भारत वर्ष के युवा योग के वैज्ञानिक पक्षों को समझें और उसे अपने जीवन में शामिल करें।

विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अशोक श्रोति और राष्ट्रीय सेवा योजना के डॉ अंशुमाली शर्मा ने भी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित किया।

मुख्य प्रशिक्षक के रूप में योगाचार्य अमित आर्य ने योग के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान और योग के द्वारा विभिन्न रोगों के इलाज में हो रहे प्रयोगों की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा योग के नियमित अभ्यास से कई असाध्य रोगों से मुक्ति संभव है। उन्होंने योग को भारतीय जीवन पद्धति का एक प्रमुख अंग बताया।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम अधिकारी डॉ लालजी पाल ने और धन्यवाद ज्ञापन रतिकेश पूर्णोदय ने किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ बाला लखेंद्र ने किया। योग प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में शिक्षक और स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं।

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