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चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मां ज्वालामुखी मंदिर पर दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, मंदिर से जुड़ी हर मान्यता के लिए पढ़ें रिपोर्ट।

सुबह से लगी भक्तों की लंबी कतारें, निःशुल्क मेले के आयोजन से खासा उत्साह।।

आदि शक्तपीठ मा ज्वालामुखी मंदिर धाम में मां जगदंबा के दर्शन व पूजन के लिए सुबह 4:00 बजे से भक्तों की लंबी कतारें लगी रही और जय माता दी के जयकारों से समूचा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। धार्मिक मान्यता अनुसार माता सती के जिह्वे का अग्रभाग शक्तिनगर में गिरा था, जहां आज आदि शक्ति रूपा मां ज्वालामुखी विराजमान है। मां ज्वालामुखी मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानने के लिए इस पूरी रिपोर्ट को पढ़ें –

मां जगदंबा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार।

मां ज्वालामुखी मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना-

आदि शक्ति पीठ मां ज्वालामुखी।

आदि शक्ति पीठ मां ज्वालामुखी मंदिर धाम में श्रद्धालुओं के पूजा पाठ का लगभग 500 वर्ष पुराना इतिहास है। वर्तमान मुख्य पुजारी श्लोक मिश्रा ने बताया कि लगभग उनकी 15 पीढ़ियां माता रानी की सेवा में लगी रहीं। सोनभद्र जिले से सटे चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार सीमावर्ती क्षेत्रों में मां ज्वालामुखी मंदिर हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है। चैत्र नवरात्र में मंदिर प्रांगण में लगभग 1 महीने तक चलने वाला विशाल मेला देश की आजादी से पहले सन 1942 से लग रहा है। लगता है। सुबह 4:00 बजे से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था व शांति बहाल करने हेतु पुलिस प्रशासन भी चाक-चौबंद व्यवस्था के साथ मुस्तैद रहा।

मंदिर में हमेशा जलती रहती है दिव्य ज्योति-

मां ज्वालामुखी मंदिर में स्थित दिव्य अखंड ज्योति।

आदि शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर में दिव्य अखंड ज्योति हमेशा जलती रहती है, जिसे जम्मू के कांगड़ा ज्वाला देवी के यहां से 9 नवंबर 2012 को लाया गया था। अखंड ज्योति को लाकर मंदिर में स्थापना के बाद से ही यह अखंड ज्योति तब से अनवरत चल रही है। मान्यता है कि आदि शक्ति रूपा मां ज्वाला के दर्शन उपरांत दिव्या खंड ज्योति का दर्शन करने पर मां जगदंबा का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नीम के पेड़ व जल कुंड से जुड़ी मान्यता-

मां ज्वालामुखी मंदिर समीप स्थित दिव्य जल कुंड।
मंदिर परिसर स्थित दैवीय नीम का पेड़।

मंदिर में सैकड़ों वर्ष पुराना नीम का पेड़ है, जिस से जुड़ी मान्यता है कि मौसम कोई भी हो नीम का पेड़ हमेशा हरा भरा रहता है। हर प्रकार के मौसम में नीम के पेड़ पर फल और फूल लगते हैं। मान्यता है कि नीम के पेड़ पर मां जगदंबा निवास करती हैं। साथ ही मंदिर के समीप प्राचीन जलकुंड है, जो कभी भी सूखता नहीं है और हमेशा स्वस्थ निर्मल बना रहता है। मान्यता है कि इस जलकुंड के पानी से नहाने व पीने मात्र से बहुत से दुख दूर हो जाते हैं।

मन्नत के लिए नारियल बांधने की परंपरा- 

आदि शक्ति पीठ मां ज्वालामुखी मंदिर धाम में मान्यता है कि मन्नत मांगने वाले नारियल को चुनरी के साथ मंदिर में बांधते हैं और जब उनकी मन्नत मां जगदंबा की कृपा से पूरी हो जाती है तो नारियल को चुनरी से खोलकर माता रानी को चढ़ाते हैं। दूर-दूर से लोग मन्नत मांगने के लिए मंदिर में आते हैं और देर सबेर हर किसी की मन्नत मां ज्वाला जगदंबा पूरी करती है।

आदि शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर मुख्य पुजारी श्लोकि प्रसाद मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद हर्षोल्लास के साथ चैत्र नवरात्रि में मां जगदंबा के दर्शन पूजन के बाद भव्य मेले का आयोजन हो रहा है। देश के आजादी से पहले 1942 से लगने वाले मेले का आयोजन इस बार भी भव्यता के साथ हो रहा है। इस बार मेले का आयोजन निशुल्क किया जा रहा है। शक्तिनगर ज्वालामुखी मंदिर शक्तिपीठ है, जहां-जहां माता सती के अंग गिरते गए वहां शक्तिपीठ बना। माता सती के जिह्वे का अग्रभाग यहां गिरा, मंदिर परिसर में नीम का पौराणिक पेड़ है जिसमें माता रानी का वास माना जाता है और हर मौसम में नीम का पेड़ हरा भरा रहता है। मंदिर के समीप प्राचीन जलकुंड है जिसके ग्रहण मात्र से पेट संबंधी कई बीमारी ठीक हो जाती है।

नवरात्र प्रथम दिन मां जगदंबा का दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालु।

मंदिर तक पहुंचने का मार्ग-

उत्तर प्रदेश राज्य के सोनभद्र जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर की दूरी पर आदि शक्ति पीठ मा ज्वालामुखी का धाम स्थित है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी तय करके शक्तिनगर ज्वाला मंदिर धाम पहुंचा जा सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य का जिला सूरजपुर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं झारखंड प्रदेश के गढ़वा जिले से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी तय कर मंदिर पहुंचा जा सकता है। साथी बिहार राज्य का भभुआ जिला की सीमा सोनभद्र जिले से लगती है।

सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद-

पिपरी क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए मंदिर व मेले में लगभग 50 पुलिसकर्मियों की तैनाती दो पाली में की जा रही है और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखा जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पीएसी बल तैनात किए गए हैं।

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