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1989 में विश्व हिंदू परिषद के आवाह्न पर भक्तों द्वारा लाई गई ईंट, राम मंदिर परिसर पहुंची।

1989 के दशक में विश्व हिंदू परिषद के आवाह्न पर देश-विदेश से अयोध्या में भगवान राम की नाम लिखे ईंटें आई थी। विश्व हिंदू परिषद ने सभी राम भक्तों से सवा सवा रुपया व एक-एक ईंटो को लाने का आह्वान किया था। 9 नवंबर को आये सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले के बाद प्रभु श्री राम का मंदिर बनने का कार्य प्रारंभ हो गया। 1989 से कार्यशाला में रखी हुई राम भक्तों द्वारा भेंट की गई उन्ही ईंटो को अब कार्यशाला से प्रभु श्रीराम के गर्भ गृह में ले जाया जा रहा है। लगभग 30 वर्षों से रखी हुई इन ईंटो को प्रभु श्री राम के मंदिर के चारों तरफ लगाया जाएगा।

कार्यशाला से राम जन्मभूमि में इन ईंटों की शिफ्टिंग कर रहे दिनेश ने बताया कि 12 मार्च से अब तक लगभग 240 ट्राली ईट कार्यशाला से राम मंदिर निर्माण स्थल तक जा चुकी है और अभी 10 से 12 दिनों का कार्य शेष बचा हुआ। कार्यशाला से जो ईंटे राम जन्मभूमि परिसर में जा रही है उनको मंदिर के चारों कोनों पर लगाया जाएगा।

अयोध्या विवाद का इतिहास-

रिपोर्ट के अनुसार प्राप्त जानकारी के मुताबिक करीब 500 वर्ष पहले अयोध्या में भगवान राम के मंदिर को गिराकर, मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर की जगह मस्जिद का निर्माण कराया था। बस 1528 के आसपास बनी मस्जिद को मुगलों ने बाबरी मस्जिद का नाम दिया। यहीं से श्री राम जन्म भूमि को लेकर विवाद की शुरुआत हुई। जिसके बाद वर्ष 1986 में फैजाबाद के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदू समाज के अनुरोध पर विवादित स्थल के दरवाजे पूजा पाठ के लिए खुलवा दिए। जिस का विरोध करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति बनाई। यहीं से हिंदू समाज में भी राम मंदिर निर्माण के लिए एकजुट होना शुरू किया। भगवान राम की जन्म स्थली में भगवान राम के मंदिर निर्माण की मांगे तेजी से उठ रही थी। राम मंदिर का निर्माण में सबसे अहम पड़ाव साल 1989 में आया जब विश्व हिंदू परिषद की नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में विवादित स्थल के पास राम मंदिर का शिलान्यास कर दिया। इसके बाद से अयोध्या विवाद देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।

दलित युवक के हाथों राम जन्मभूमि का शिलान्यास-

अयोध्या विवाद के चैप्टर में 9 नवंबर 1989 की तारीख हादसा महत्वपूर्ण है, इसी दिन विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में हजारों हिंदू समाज के लोगों ने अयोध्या में राम जन्मभूमि का शिलान्यास किया था। सैकड़ों राजनीतिक हस्तियों व बड़े-बड़े साधु संतों के बीच उस समय दलित युवक कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर के न्यू की पहली ईंट रखने का फल सभी को याद है।

राम मंदिर निर्माण के लिए पूरे देश से ईंटें मंगाई गई थी-

राम मंदिर शिलान्यास से पहले पूरे देश में विहिप ने इसके लिए अभियान चला रखा था। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज एकत्रित होने लगा था। शिलान्यास व शिला पूजन के लिए विश्व हिंदू परिषद ने पूरे देश में यात्राएं आयोजित की और देश के हर नागरिक से एक ईंट का योगदान देने के लिए कहा गया था। विश्व हिंदू परिषद ने देश के दो लाख से ज्यादा गांव में मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं वह ईटें जुटाने का अभियान छेड़ा था। श्री राम लिखी ईंटें भगवा कपड़ों में लिपट कर अयोध्या पहुंचने लगी।

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