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चुनाव लड़ने में ब्राह्मण आगे लेकिन जितने में ठाकुर आगे, हर जाति के विधायक पर अपडेट।

चुनाव जीतने में ठाकुर ब्राह्मणों से आगे : जाने कौन सी जाति से कितने विधायक पहुंचने विधानसभा?

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया और समाजवादियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस पूरी जीत के पीछे सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को भी अहम माना जा रहा है, जिसमें सभी राजनीतिक पार्टियों ने जातीय समीकरण को साधते हुए हर सीट पर उम्मीदवारों की घोषणा की थी। इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा सीटों पर ब्राह्मणों ने चुनाव लड़ा लेकिन जीतने के मामले में वह ठाकुरों से पिछड़ गए। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने सबसे ज्यादा ब्राह्मणों और ठाकुरों को चुनाव लड़ाया था।

भाजपा और सपा की तरफ से 177 ब्राह्मण और 122 ठाकुर मैदान में थे लेकिन चुनाव लड़ने और जीतने के मामले में उन प्रत्याशियों में से 37% ठाकुर जीते जबकि ब्राह्मण केवल 28% ही जीत जाए। एक आंकड़े से समझा जा सकता है कि किस राजनीतिक पार्टी ने किस जाति पर भरोसा जताया और किस जाति के कितने विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे, पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से 86 सीट है पहले से आरक्षित हैं। जिनमें से 84 सीटों को अनुसूचित जाति और 2 सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। इसलिए इन 86 सीटों पर प्रत्याशियों के जीत के प्रतिशत की चर्चा नहीं की जाएगी और साथ ही मुस्लिम उम्मीदवारों की भी बात नहीं की जाएगी क्योंकि भाजपा ने किसी भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था। जबकि समाजवादी पार्टी नहीं 63 मुसलमानों को टिकट दिया था जिनमें से 34 जीत गए। भाजपा की सहयोगी दल गठबंधन से एक मुस्लिम प्रत्याशी ने चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गए।

विधानसभा चुनाव में ओबीसी को पीछे छोड़ते हुए सवर्णों ने बाजी मारी-

भारतीय जनता पार्टी (OBC-143, General-173) और समाजवादी पार्टी (OBC-171, General-79) ने कुल मिलाकर 314 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 252 सवर्णों (General) उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। लेकिन चुनाव के बाद जितने के मुकाबले में सवारों ने पिछड़ा वर्ग को पीछे छोड़ते हुए ज्यादा सीटों पर कब्जा किया। स्वर्ण जाति से 50% प्रत्याशी जीते जबकि ओबीसी से मात्र 47 वर्ष ही जीत पाए।

भाजपा और सपा के कुल उम्मीदवारों की जातिगत आंकड़ों पर एक नजर-

1). राजपूत/ठाकुर – भाजपा गठबंधन ने 71 राजपूतों को चुनाव लड़ाया जिसमें से 43 जीते, वहीं सपा गठबंधन में 23 राजपूतों को टिकट दिया जिसमें 4 ही जीत दर्ज कर पाए।

2). ब्राह्मण – भाजपा गठबंधन ने 68 ब्राह्मणों को चुनाव मैदान में उतारा जिसमें 46 जीत गए, वहीं सपा गठबंधन ने 29 ब्राह्मणों को टिकट दिया जिसमें से 5 ही जीत पाए।

3). कुर्मी – भाजपा गठबंधन ने 34 कुर्मी जाति प्रत्याशियों को मैदान में उतारा और 27 बार जीत दर्ज की, वहीं सपा गठबंधन a37 कुर्मी प्रत्याशियों को लड़ाया जिसमें 13 ही जीत पाए।

4). यादव – सपा गठबंधन ने 52 यादव को टिकट दिया जिसमें 27 जीते, जबकि भाजपा गठबंधन ने 8 यादों को चुनाव लड़ाया और 3 सीट जीत लिया।

5). मौर्या – भाजपा गठबंधन से 25 लड़े और 12 जीते, जबकि सपा गठबंधन ने 18 को लड़ाया 2 जीते।

6). निषाद – भाजपा गठबंधन ने 10 निषाद, बिंद, कश्यप, मल्लाह जातियों के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया और 6 पर जीत दर्ज की, वहीं सपा गठबंधन ने 9 को मैदान में उतारा और 2 पर जीते।

7). बनिया – भाजपा गठबंधन 28 को लड़ाया और 21 सीट पर जीत दर्ज की, वहीं सपा गठबंधन में 7 को लड़ाया और 3 पर जीते।

8). जाट – भाजपा गठबंधन ने 17 जाटों को मैदान में उतारा और 8 जीत गए, वहीं सपा गठबंधन ने 16 को टिकट दिया और 7 पर जीत दर्ज की।

9). लोध – भाजपा गठबंधन ने 17 लोध जाति से प्रत्याशियों को टिकट दिया और 15 पर जीत दर्ज की, वहीं सपा गठबंधन ने 7 को लड़ाया और 3 पर जीते।

10). राजभर – भाजपा गठबंधन ने 5 राजभर जाति के प्रत्याशियों को लड़ाया और 1 पर ही जीत दर्ज करने में सफल हो सके, जबकि सपा गठबंधन ने 4 को टिकट दिया और 3 पर बाजी मारी ली।

11). भूमिहार – भाजपा गठबंधन ने 6 भूमिहारों को लड़ाया और 4 सीट जीतने में सफल रहे, वहीं सपा गठबंधन ने 4 को टिकट दिया और मात्र 1 सीट जीत पाए।

आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो चुनाव लड़ कर जीतने वाली जाति में लोध/कुर्मी का प्रतिशत सबसे ज्यादा देखने को मिला। वहीं सबसे ज्यादा सीटों पर ब्राह्मण जाति ने चुनाव लड़ा और जितने का प्रतिशत मात्र 28% ही रहा। राजपूत समुदाय के 122 प्रत्याशी मैदान में उतरे और 37% के साथ ब्राह्मणों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज किया। 10 मार्च को मतगणना में जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने का न्योता दे दिया है और जाति के हिसाब से जीते विधायकों को साधने के लिए मंत्रिमंडल के विस्तार पर कवायद व माथापच्ची शुरू हो गई। 25 मार्च को इकाना स्टेडियम में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

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