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कोयला खदान क्षेत्र में महिला का कुएं में मिला शव।

एनसीएल खड़िया खदान क्षेत्र में निवासरत हैं दर्जनों परिवार।

शक्तिनगर। एनसीएल खड़िया खदान क्षेत्र के न्यू वर्कशॉप समीप कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिलने की खबर से क्षेत्र में सनसनी फैल गई और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची स्थानीय थाना पुलिस व एनसीएल सिक्योरिटी के प्रयास से शव को बाहर निकाला गया। खदान क्षेत्र के अंदर ही निवासरत राजू ने बताया कि शव उसकी दादी सिमरिया देवी पत्नी स्वर्गीय हंसलाल बैगा उम्र 70 वर्ष निवासी खड़िया खदान बैरियर नंबर 3, शक्तिनगर का है, जो गुरुवार शाम नाराज होकर घर से चली गई थी। मौके पर उपस्थित प्रभारी निरीक्षक मिथिलेश कुमार मिश्र की देखरेख में पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए दुद्धी भिजवाया गया।

खड़िया खदान क्षेत्र के न्यू वर्कशॉप संमीप कुएं में शव मिलने की सूचना ग्राम प्रधान के माध्यम से पुलिस को कांति चौबे ने दी और बताया कि खड़िया खदान क्षेत्र के अंदर मुआवजा न मिलने के कारण वह बरसों से अपनी जमीन पर निवासरत है, उनकी जमीन पर ही बने कुएं में महिला का शव सुबह तकरीबन पांच बजे उनके बेटे ने देखा और प्रकरण की जानकारी ग्राम प्रधान को दिया। जिस पर ग्राम प्रधान ने पुलिस को सूचना दी। वहीं गुरुवार की शाम से गायब अपनी दादी को तलाश करता राजू कुएं के पास भीड़ देख पहुंचा तो मृत बुजुर्ग महिला के कपड़ों को देख बताया कि यह उसकी दादी है और फिर एनसीएल सिक्योरिटी की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला गया।

पिपरी क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चंदेल ने फोन पर बताया कि स्थानीय थाने से घटना की सूचना प्राप्त हुई है और पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट आने पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

खदान सुरक्षा नियमों के अनुसार खदान क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आबादी का निवास करना पूर्ण रूप से वर्जित होता है। ऐसे में मुआवजा ना मिलने की बात करते हुए कई लोग खड़िया खदान क्षेत्र में निवासरत हैं और आए दिन खदान क्षेत्र के अंदर दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं। उपरोक्त प्रकरण में ही यू वर्कशॉप के बगल में कांति चौबे का परिवार कई वर्षों से मुआवजे की मांग को लेकर काबिज तो वहीं पुरानी सीएचपी के पास भी लगभग दस परिवार खदान क्षेत्र में ही घर बना के रहते हैं। कोयला खदान क्षेत्र होने के कारण बड़ी-बड़ी गाड़ियों का आवागमन व प्रतिदिन होने वाले ब्लास्टिंग से खतरा मंडराता रहता है। खदान सुरक्षा नियमों के विशेषज्ञ बताते हैं कि खदान क्षेत्र के अंदर आबादी का निवास होना प्रबंधन की उदासीनता व लापरवाही को दर्शाता है।

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