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जनता तो बेचारी सीता है : पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा।

एनटीपीसी सिंगरौली में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत कवि सम्मेलन आयोजित।

एनटीपीसी सिंगरौली द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव का चार दिवसीय कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत मंगलवार को आमजन के मनोरंजन हेतु कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गण्यमान्य अतिथि पूर्व परियोजना प्रमुख एसके दास गुप्ता, श्रीमती एसके दासगुप्ता, काशी विद्यापीठ कुलपति आनंद त्यागी, श्रीमति देवसुत्ता त्यागी, एनटीपीसी मुख्य महाप्रबंधक वसुराज गोस्वामी, वनिता समाज अध्यक्षा श्रीमती जयिता गोस्वामी एवं आमंत्रित कविगण द्वारा दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

तदुपरान्त परियोजना प्रमुख बसुराज गोस्वामी एवं श्रीमती जयिता गोस्वामी द्वारा ख्यातिप्राप्त कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, कमलेश राजहंस, कवियत्री डॉ कीर्ति काले, शंभू शिखर, मनमोहन मिश्र, डॉ नागेश शांडिल्य, डॉ श्लेष गौतम, सुश्री मनिका दूबे, डॉ योगेंद्र मिश्र का अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर डॉ श्लेष गौतम, प्रयागराज ने अपनी पंक्तियाँ “यही जज़्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा, ज़मीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा, ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी, इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा ” से सभी दर्शकों का मन मोह लिया ।

कवियत्री डॉ कीर्ति काले ने बेटी की बिदाई पर “भर भर हाय नैना, दिन रहना नहीं चैना, मन में उठा है भूचाल रे, बिटिया चली है ससुराल रे” पर मनमोहक प्रस्तुति पेश की।

भारतीय संस्कृति को दर्शाते हुए राष्ट्रीय फलक पर कविता के क्षेत्र में अलग पहचान रखने वाले सोनभद्र जिले के कवि कमलेश राजहंस ने “ महक उठता है मेरा गांव सारा ईद होली पर, मोहर्रम पर बड़ी तादाद में मातम मनाते हैं, सियासत का लगा चश्मा न मेरे गांव को देखो, यहां रिजवान भोले नाथ का कांवर बनाते हैं” पर पंक्तियाँ पेश की।

डॉ योगेंद्र मिश्र ने परस्पर प्रेम पर आधारित पंक्ति “तुम फ़तवे जारी करते हो, हम दस्ते-दुआ फैलाते हैं,तुम नफ़रत के सौदागर हो, हम दिल का दाँव लगाते हैं। हम होली हैं, हम ईद भी हैं, हम क्रिसमस भी, बैसाखी भी, पूरब से लेकर पश्चिम तक पैग़ामे-अमन ले जाते हैं।“ सुना कर दर्शकों का मन मोह लिया।

सुश्री मनिका दूबे ने “ कोई अनबन, कोई शिकवा, कोई झगड़ा नहीं होगा, चलो वादा करें कि अब कोई गुस्सा नहीं होगा” सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने अपनी सुप्रसिद्ध पंक्तियाँ “कोई फर्क नहीं पड़ता,इस देश में राजा रावण हो या राम,जनता तो बेचारी सीता है रावण राजा हुआ तो वनवास से चोरी चली जाएगी और राम राजा हुआ तो अग्नि परीक्षा के बाद फिर वनवास में भेज दी जाएगी।“ सुनाकर वास्तविक जीवन की सच्चाई पेश की।

श्री शंभू शिखर ने कहा कि “हम श्रमनायक हैं भारत के और मेधा के अवतारी हैं,हम सौ पर भारी एक पड़ें, हम धरतीपुत्र बिहारी हैं, वेदों के कितने बंद रचे, हमने गायत्री छंद रचे, साहित्य सरित की धारा में कितने ही काव्य प्रबंध रचे, हम दिनकर, रेणु, विद्यापति और भिखारी हैं,हम धरतीपुत्र बिहारी हैं , हम धरतीपुत्र बिहारी हैं” सुनाकर बिहार के गौरव को दर्शाया।

कार्यक्रम में शक्तिनगर थाना प्रभारी मिथलेश मिश्रा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ निदेशक चन्द्रशेखर सिंह, आस-पास के ग्राम प्रधान, जन प्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि सहित अन्य गण्यमान्य अतिथि एवं बड़ी संख्या में दर्शक पधारे।

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