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बस एक रात की कहानी है सारी, यही रात अंतिम, यही रात भारी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के 7 चरणों का मतदान पूर्ण हो चुका है और 10 मार्च को मतों की गिनती होगी। ईवीएम का पिटारा खुलेगा और प्रदेश के उच्च सदन में पहुंचने के लिए प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला सुनाया जाएगा। सुबह 8:00 बजे से प्रदेश के सभी जनपदों में निगरानी जिम्मेदार अधिकारियों के देखरेख में उचित सुरक्षा के बीच मतगणना प्रारंभ हो जाएगा। 10 फरवरी से प्रथम चरण से शुरू हुआ उत्तर प्रदेश चुनाव 7 चरणों में 7 मार्च को मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गया और अब 10 मार्च को मतों की गिनती होगी। लगभग 1 महीने तक चले लंबे चुनाव प्रचार प्रसार के बाद अंतिम रात काटते हुए प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई और उनके हर धड़कन के साथ एक ही गाना शोर के रूप में सुनाई दे रहा है-

“यही रात अंतिम, यही रात भारी ।
बस एक रात की अब कहानी है सारी ।
यही रात अंतिम, यही रात भारी ।”

403 विधानसभा सीटों के चुनाव में किसका पलड़ा भारी होगा, या 10 मार्च को मतगणना के बाद तस्वीर साफ दिखाई देने लगेगी। 75 जिले वाले राज्य में 80 लोकसभा सीटें व 130 राज्यसभा सीटें हैं। विधान परिषद में 100 सदस्य चुने जाते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि देश की राजनीति में उसी का सिक्का चलता है जो उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होता है। इसीलिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 पर देश ही नहीं विश्व की नजरें गड़ी हुई है।

ईवीएम में वोटों की चोरी का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने प्रदेश में सभी मतगणना स्थलों पर मतगणना प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं और लोकतंत्र बचाने की अंतिम लड़ाई के आवाहन के साथ समाजवादी कार्यकर्ताओं को चौकन्ना रहने की अपील की है। अब मतगणना से एक रात पूर्व चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों की आंखों से नींद उड़ गई है और हर उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान दावों के बीच आंकड़ों को देखते हुए अपनी जीत पर आशंकित है। मतगणना से पूर्व प्रत्याशियों की रात करवट बदलते जीतने की उम्मीद है तो सपा प्रत्याशी स्ट्रांग रूम के पहरेदारी में रात भर जागरण कर सकते हैं।

हर पार्टी एग्जिट पोल में अपने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का दावा कर रही है और कार्यकर्ताओं को लोकतंत्र का दुहाई दे डटे रहने को निर्देशित कर रही है। अब तो जब 10 मार्च को मतों का पिटारा खुलेगा तब पता चलेगा कि किसके सिर पर जीत का सेहरा बनता है और किस की जमानत जब्त होती है?

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