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2 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा और चारों विधानसभा सीटों का रुझान।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण 7 मार्च को सोनभद्र में 4 विधानसभा सीटों घोरावल, राबर्ट्सगंज सदर, ओबरा व दुद्धी में मतदान होने हैं और माना जा रहा है कि सातवें चरण में जिस का पलड़ा भारी होगा, सरकार उसी की बनेगी। सोनभद्र जिला भौगोलिक रूप से बहुत बड़ा है और सुदूर आदिवासी अंचलों में प्रचार प्रसार के लिए पगडंडियों का ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में कम समय में बड़ी आबादी तक अपनी बात पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 2 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनपद मुख्यालय पर जनसभा रखी है और जिस तरह से भाजपा भीड़ जुटाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है उससे तो यही लगता है कि नरेंद्र मोदी की जनसभा बाद भाजपा सोनभद्र जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर कमल खिलाने में कामयाबी के बेहद करीब होगी।

सोनभद्र जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों का मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों से ही होना है। घोरावल विधानसभा सीट पर निवर्तमान विधायक व प्रत्याशी अनिल मौर्य को कांटे की टक्कर सपा प्रत्याशी रमेश दुबे से मिल रही है लेकिन चुनावी विशेषज्ञों की माने तो देरी से टिकट की घोषणा करने के कारण रमेश दुबे के प्रचार प्रसार में जीत वाली धार नजर नहीं आती और अनिल मौर्या की दावेदारी जनसमर्थन से बाकी प्रत्याशियों के मुकाबले बहुत आगे निकल गई है।

राबर्ट्सगंज सदर विधानसभा सीट पर भाजपा ने भूपेश पर भरोसा करते हुए फिर से उम्मीदवार बनाया है तो वहींं सपा को पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा से उम्मीद लगी हुई है। राजनीतिक पंडित मान रहे थे कि 2022 विधानसभा चुनाव में अविनाश कुशवाहा के मुकाबले भूपेश चौबे कमजोर उम्मीदवार साबित होंगे लेकिन भाजपा कार्यकर्ता त्रिदेव सम्मेलन में भूपेश चौबे की सरलता व सहजता ने सबको चौंकाते हुए अपने कार्यकर्ता परिवार से कान पकड़कर माफी मांगने की वीडियो वायरल होने से, भूपेश के पक्ष में ब्राह्मण वोटों का ध्रुवीकरण काफी हद तक संभव हो सकता है। समाजवादी पार्टी द्वारा जिस प्रकार से भूपेश चौबे के कान पकड़ के उठक बैठक करने को मुद्दा बनाया गया, उससे लगता है कि सदर सीट पर इस चुनाव में विकास का मुद्दा ना के बराबर रहेगा। आम जनता की माने तो बसपा प्रत्याशी अविनाश शुक्ला भी खेल बिगाड़ सकते हैं और पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में जीत का अंतर बहुत कम रहेगा।

ओबरा विधानसभा सीट पर भाजपा ने प्रदेश सरकार में एकमात्र अनुसूचित जनजाति कोटे से बनाए गए मंत्री संजीव गोंड पर विश्वास जताया है और विशेषज्ञों की मानें तो संजीव गोंड के मुकाबले बाकी पर पार्टी के प्रत्याशियों में वह चमक नहीं दिखता, जिससे चुनाव में कोई बड़ी फेरबदल संभव हो सके। संजीव गोंड की आदिवासी समाज में बढ़ती लोकप्रियता व कई दशकों से विकास का बाट जोहता आदिवासी समुदाय के बीच सुदूर अंचलों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की जीद, विपक्षी प्रत्याशियों को बहुत पीछे छोड़ देती है। चट्टी चौराहों पर हो रही चुनावी चकल्लस के बीच संजीव गोंड का पलड़ा भारी दिखता है।

दुद्धी विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा की सहयोगी दल अपना दल एस ने खाता खोला था और इस बार निवर्तमान विधायक हरिराम चेरो के बसपा का दामन थाम लेने के बाद भाजपा अपना उम्मीदवार राम दुलारे गोड़ के रूप में लड़ा रही है। इस बार के विधानसभा चुनाव में यूपी की अंतिम सीट दुद्धी पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। कई पार्टियों से जीत का स्वाद चख चुके कद्दावर आदिवासी नेता पूर्व मंत्री विजय सिंह गोड़, इस बार अखिलेश की साइकिल पर सवारी कर रहे हैं और उम्र के इस पड़ाव पर भी साइकिल की गति तेज रहेगी की बात करते हैं। वहीं भाजपा अपने प्रत्याशी को भगवान राम का दुलारा कह जनता से समर्थन मांग रही है तो बसपा प्रत्याशी हरिराम चेरो अपने 5 वर्ष के कार्यकाल पर जनता के बीच ताल ठोक रहे हैं। लगभग तीन दशक बाद भाजपा फिर से दुद्धी विधानसभा सीट पर कमल खिलाने का भरपूर प्रयास जारी रखी है। दुद्धी विधानसभा सीट के आंकड़ों पर चुनावी विशेषज्ञों की बात माने तो हरिराम चेरो डार्क हॉर्स साबित हो सकते हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी बसंती पनिका को उनके पति पूर्व सांसद स्व रामप्यारे पनिका के किए क्षेत्र में विकास कार्यों के कारण जनता से समर्थन मिल रहा है और जनपद के चारों विधानसभा सीटों पर राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी से बसंती पनिका एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं।

भाजपा सोनभद्र द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा की तैयारियों को देखते हुए लग रहा है कि कम से कम एक लाख की भीड़ उमड़ने की संभावना है और प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को सुनने के बाद 7 मार्च को चुनाव में फिजा बदली हुई नजर आ सकती है। गांव मोहल्ले व बाजारों में आम जनता की राय के आधार पर मोदी की जनसभा के बाद भाजपा के प्रचार की सुनामी में विपक्षियों के हवा हवाई दावे उड़ कर बिखर सकते हैं। बाकी आगामी 10 मार्च को जब मतों की गिनती शुरू होगी तो पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा?

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