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MP : खाट पर मामा शिवराज का हेल्थ सिस्टम, चार बेटियों ने 80 साल की मां का शव उठाकर गांव लाईं।

चार बेटियों ने मां का शव खाट पर उठाकर लाईं, शिवराज सरकार के हेल्थ सिस्टम की खुली पोल।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विकास के दावों की हकीकत की पोल उस समय खुल गई जब रीवा जिले में 80 साल की बुजुर्ग के शव को उनकी चार बेटियों ने एंबुलेंस न मिलने के कारण खाट पर उठाकर गांव तक लाईं, जिस किसी ने भी खाट पर शव को ले जाने का मंजर देखा उसने शिवराज सरकार को कोसते हुए कहा कि खाट पर मामा शिवराज का हेल्थ सिस्टम ढोया जा रहा है। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान विकास के हवा हवाई दावे करते मीडिया कैमरे के सामने अक्सर दिख जाएंगे, लेकिन महिला को अस्पताल ले जाने और शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिलने की तस्वीर उनकी आंखों से ओझल हो जाएगी?

Photo : Social media

दरअसल पूरा मामला रीवा जिले में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब होने पर अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने जब एंबुलेंस बुलाई तो कई घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस के ना पर बुजुर्ग महिला की 4 बेटियों ने अपनी मां को खाट समेत उठाकर सामुदायिक केंद्र ले जाने का निर्णय किया और स्वास्थ्य केंद्र लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद महिला के शव को घर ले जाने के लिए जब शव वाहन या एंबुलेंस नहीं मिला तो चारों बेटियों ने मजबूरन मां की शव को खाट पर लादकर 2 घंटे की यात्रा उपरांत घर पहुंची, उनकी इस दर्द भरी यात्रा में एक छोटी बच्ची भी थी।

पूरा घटनाक्रम रीवा जिले के महुआ गांव से जुड़ा हुआ है। गांव निवासी मोलिया केवट उम्र 80 वर्ष की तबीयत खराब होने पर इलाज के लिए उन की 4 बेटियां खाट के सहारे रायपुर कर्चुलियान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, जहां चेकअप के बाद डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित डॉक्टरों से शव वाहन की जानकारी ली तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ‌ जिसके बाद बुजुर्ग के शव को खाट पर लेकर उनकी बेटियां घर की ओर चल दीं।

पूरे घटनाक्रम को लेकर लौटते वक्त राहगीरों ने वीडियो बनाकर मध्य प्रदेश सरकार की हेल्थ सिस्टम की असलियत को वायरल कर दिया। शव को लेकर घर की ओर जाते हुए रास्ते में रायपुर कर्चुलियान थाना भी मिला लेकिन पूरा सिस्टम तमाशबीन बना रहा।

वहीं सूत्रों के हवाले से जानकारी प्राप्त हुई की रीवा जिला मुख्यालय में शव को लाने ले जाने के लिए सिर्फ रेड क्रॉस सोसाइटी वाहन उपलब्ध कराता है। जिला मुख्यालय पर शव वाहन की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ मरीज को मुक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने की है और मौत के बाद अपने जुगाड़ पर लाश ले जाना पड़ता है।

यहां पर यह जानना जरूरी है कि लंबे अरसे तक शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मात्र 1.5 वर्ष के लिए कमलनाथ मुख्यमंत्री रहे और बदलते समीकरण के बीच शिवराज सिंह चौहान पूर्व मुख्यमंत्री चुने गए। ऐसे में मध्यप्रदेश में हेल्थ सिस्टम किस तिराहे पर खड़ा है और पूर्व में शिवराज सिंह चौहान ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए क्या योगदान दिया है? यह विचार करने वाले तथ्य है। प्रदेश से गाहे-बगाहे एंबुलेंस ना मिलने के कारण परिजनों द्वारा शव को मोटरसाइकिल आदि से ले जाने को विवश होते हैं।

ऐसे में जनता के सामाजिक सरोकार के मुद्दे पर नपुंसक हो चुके नेताओं के विकासवादी सोच को जनता के मन में जूते मारने का मन होता होगा? चुनाव के बीच लंबे चौड़े वादों को सुनने के बाद अपने परिजनों के शव की भी दुर्गति होते देखना, कितना दुखदायक होता होगा, यह बात आम आदमी के टैक्स से खरीदी जाने वाली वातानुकूलित गाड़ियों में सफर करने वाले नेता जी क्या जाने ?

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