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बजट सत्र शुरू होते ही कांग्रेस दो धड़े में बटी, जीतू पटवारी के फैसले पर कमलनाथ का पलटवार।

मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र पर राज्यपाल के अभिभाषण के बहिष्कार की घोषणा करने के कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के फैसले को पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने विधानसभा की गरिमा का हवाला देते हुए गलत ठहरा दिया है और ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कमलनाथ का समर्थन कर मध्य प्रदेश कांग्रेस को दो धड़े में बांट दिया है। इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हम दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कमलनाथ के फैसले का सम्मान करते हैं और जीतू पटवारी ने सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए सोशल मीडिया पर राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार किया। मैं कमलनाथ का आभारी हूं जिन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर या कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण का फैसला गैर परंपरागत है।

दरअसल पूरा मामला विधानसभा के बजट सत्र करवाई शुरू होने से पहले मध्य प्रदेश पूर्व मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला कर दिया और अभिभाषण के बहिष्कार का एलान करते ही जीतू पटवारी को मीडिया में खासी सुर्खियां भी मिली, लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने जीतू पटवारी के बयान से किनारा कर लिया। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने बीच सदन में यह कह कर वह चारभुजा दिया कि यह व्यक्तिगत राय हो सकती है पार्टी का फैसला नहीं है। उन्हें भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही इसकी जानकारी मिली है और राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध करने की परंपरा नहीं रही है और हम इसका समर्थन नहीं करते हैं। इसके बाद बजट सत्र शुरू होते ही मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आई।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार पता चला है कि पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष बनने की दावेदारी कर रहे हैं और इसी के चलते ही एक कदम आगे बढ़कर उन्होंने पार्टी को विश्वास में लिए बिना ही राज्यपाल के अभिभाषण के बहिष्कार की घोषणा करने का फैसला किया। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मध्य प्रदेश गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस पूरे नाटक की स्क्रिप्ट खुद लिखी है और बजट सत्र शुरू होने से 1 दिन पहले ही नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि कमलनाथ को कांग्रेस के सीनियर और अनुभवी नेता डॉक्टर गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए पद छोड़ना चाहिए क्योंकि कमलनाथ की व्यस्तता ज्यादा होने के कारण वह सदन में पूरे समय उपस्थित नहीं रह पाते हैं। नरोत्तम मिश्रा के सवाल उठाने के बाद पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉक्टर गोविंद सिंह कहा था कि नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ के पास दोहोरी जिम्मेदारी है, वह प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में यदि पार्टी उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की फैसला लेती है तो वह या जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि डॉ सिंह के इस बयान से जीतू पटवारी परेशान हो गए थे और उन्हें लगने लगा कि नेता प्रतिपक्ष बनने की उनकी दावेदारी कमजोर हो रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार रविवार को कमलनाथ के निवास पर विधायक दल की बैठक हुई थी, बैठक में जीतू पटवारी की उपस्थिति ना होने से अंदेशा जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसी बैठक में शिवराज सरकार को बजट सत्र में घेरने की रणनीति तैयार की गई और यह तय हुआ कि कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे और कौन से विधायक कांग्रेस पार्टी का पक्ष सदन में रखेंगे।

जीतू पटवारी ने राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि मध्यप्रदेश में गायों की हत्या के मामले में विश्व रिकॉर्ड बना दिया है? इस सरकार में लोकतंत्र की हत्या की गई। सरकार ने पंचायत चुनाव व स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराए। मध्य प्रदेश तीन लाख करोड़ से ज्यादा के कर्ज में दबा हुआ है और हर व्यक्ति पर करीब ₹50000 का खर्च है। पटवारी जी एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि किसानों का कर्जा खा गए, किसानों के बीमा में अनियमितता और गबन हो गया, 3500 शराब की दुकानें खोल दीं, रोजगार की बात नहीं कर सकते व सरकार से सवाल नहीं पूछ सकते, शराबी बनो और मस्त रहो। हर घर आपने शराब रखो। ऐसा प्रदेश का मुख्यमंत्री दूसरा कभी नहीं देखा। ऐसे मुख्यमंत्री के सरकार का अभिभाषण कैसे सुना जा सकता है?

मध्य प्रदेश गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने डॉक्टर गोविंद सिंह का नेता प्रतिपक्ष के लिए नाम उछालकर बजट सत्र में शिवराज सरकार को घेरने की कांग्रेस की रणनीति को कांग्रेस पार्टी में ही उलझा दिया है और कांग्रेस की सियासत गरमा दिया एवं जीतू पटवारी को अपने जाल में फंसा लिया। वहीं कांग्रेस वरिष्ठ नेता व कमलनाथ के करीबी सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष वही बनेगा जो युवा व बेदाग होगा। दरअसल डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने गोविंद सिंह का नाम इसलिए सुर्खियों में लाया क्योंकि माना जाता है कि दिग्विजय सिंह के करीबियों में गोविंद सिंह की गिनती होती है और जीतू पटवारी जी दिग्विजय सिंह गुट के नेता हैं। ऐसे में कमलनाथ के नेता प्रतिपक्ष के दोहरी जिम्मेदारी का जिक्र कर नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय गुट के नेताओं को आगे कर मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी को दो धड़े में बांट दिया है। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस की सियासत किस करवट पलटती है?

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