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चुनाव हारे पुष्कर धामी को भाजपा ने चुना उत्तराखंड का मुख्यमंत्री? जाने कारण।

बड़ा अजीब संकट होता है जब जिस सेनापति के नेतृत्व में लड़ाई लड़ा जाए और युद्ध जीतने के बाद सेनापति हार जाए, जीत की खुशी के बीच सेनापति के हारने से नेतृत्व का संकट खड़ा हो जाता है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा विजय रथ का चेहरा बने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी खुद हारने के बाद भी पार्टी को पुनः सत्ता में लाने में कामयाबी हासिल की। बहुमत मिलने के साथ ही उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के नाम व चेहरे को लेकर सियासी हलचल मची हुई थी। लेकिन 10 दिन बाद भाजपा ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए उत्तराखंड पार्टी के विधायक दल के नेता के रूप में पुष्कर धामी का चयन कर निर्देश दे दिया है कि पुष्कर सिंह धामी ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होंगे।

पार्टी को बहुमत मिलने के और खुद के विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्हें रिटर्न गिफ्ट के रूप में मुख्यमंत्री का ताज सौप दिया है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 7 महीने के कार्यकाल में पार्टी के प्रति जनता की नाराजगी को दूर करने में धामी की विशेष भूमिका रही और उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड में 47 सीटें जीतने में कामयाबी पाई। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मॉडल को जनता के बीच पहुंचाने और पार्टी आलाकमान से बेहतर संबंध स्थापित होने से पुष्कर सिंह धामी को दोबारा मुख्यमंत्री का मौका मिला।

चुनाव हारने वाले पुष्कर सिंह धामी पर भाजपा ने क्यों जताया भरोसा ?

उत्तराखंड की खटीमा विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी विधायक दल के नेता के रूप में पुष्कर सिंह धामी का चयन हो गया है। विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी को खुद के नेतृत्व में दो तिहाई बहुमत दिलाने में कामयाबी पाई। राज्य में चल रही एंटी इनकंबेंसी को दूर करने में और जनता के बीच भाजपा को पहली पसंद बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने जी तोड़ मेहनत किया। देवभूमि के युवाओं के बीच उनकी काफी लोकप्रियता और दूसरे मुख्यमंत्रियों के मुकाबले अलग ईमानदार छवि ने पार्टी को विधानसभा चुनाव में 47 सीटें दिलाईं।

4 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और इसके बाद ही कई योजनाओं का ऐलान कर दिया। छात्रों के लिए मुफ्त टेबलेट, खिलाड़ियों के लिए नई खेल नीति, जनसंख्या नियंत्रण पर कानून, पौड़ी व अल्मोड़ा को रेलवे लाइन से जोड़ने जैसी योजनाओं का ऐलान किया। मुख्यमंत्री की शपथ लेने के साथ ही उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं व युवा नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा।

20 साल में उत्तराखंड ने देखे 11 मुख्यमंत्री-

उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य निर्माण के 20 साल के दरमियान प्रदेश में 11 मुख्यमंत्रियों का चेहरा देखा, जिसमें भाजपा से 7 मुख्यमंत्री तो कांग्रेस पार्टी से तीन मुख्यमंत्री हुए। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सभी 11 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ नारायण दत्त तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। सारे मिथकों व अटकलों को पीछे छोड़ते हुए पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और चुनाव हारने के बाद भी पुष्कर सिंह धामी को पार्टी आलाकमान की तरफ से गिफ्ट के रूप में मुख्यमंत्री का पद मिला।

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