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पुलिस दर्ज ना करें F.I.R. तो क्या करें ?

अक्सर सुनने को मिलता है कि पीड़ित के तहरीर देने के बाद भी पुलिस एफ एफआईआर दर्ज नहीं करती है और टालमटोल करते हुए पीड़ित को बहानेबाजी में उलझाए रहते हैं। अपने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल रखना पुलिस प्रशासन का प्रथम दायित्व है और समाज में अपराध पर नियंत्रण रखना कर्तव्य है। ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं की कई बार भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की वजह से पीड़ित को न्याय मिलने में देरी होती है। कोई भी घटना घटित होने पर पीड़ित को सबसे पहले पुलिस को सूचना देनी होती है और यदि पुलिस प्रशासन पीड़ित की शिकायत को दर्ज नहीं करता है तो पीड़ित को क्या कदम उठाने चाहिए ? अपने अधिकार जानने के लिए पूरे आर्टिकल को पढ़ें-

पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी हमेशा प्रयासरत रहते हैं कि आमजन को नजदीकी थाना जाने पर न्याय मिलने में देरी ना हो। लेकिन कुछ भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की वजह से लोगों को न्याय मिलने में देरी होती है या न्याय नहीं मिल पाता है। किसी भी व्यक्ति को अपने आसपास कोई घटना होती है तो नजदीकी थाने में घटना की शिकायत कर प्राथमिकी रजिस्टर करवानी होती है, जिसे F.I.R. कहते हैं। जिस को आधार बनाकर पुलिस जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है और विवेचना करती है। लेकिन कई बार सुनने को मिलता है कि पीड़ित की तहरीर देने के बाद भी पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है। ऐसे में यदि एफआईआर दर्ज करनी हो तो पीड़ित क्या करें-

किसी भी पीड़ित की शिकायत को अगर पुलिस प्रशासन नजरअंदाज करती है तो पीड़ित व्यक्ति अपनी तहरीर को ऑनलाइन के जरिए रजिस्टर करा सकता है। यदि थानेदार पुलिस शिकायत दर्ज करने से मना करता है तो जिले के आला अधिकारी से मिलकर पीड़ित को शिकायत करनी चाहिए। यदि फिर भी पीड़ित की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं होती है तो सीआरपीसी के सेक्शन 156-(3) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के पास शिकायत कर सकता है और मजिस्ट्रेट के पास अधिकार होता है कि वह पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं।

कई बार सुनने को मिलता है कि हत्या तक के मामले में भी कोर्ट के आदेश के बाद ही पुलिस एफआईआर दर्ज करती है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस को एफ आई आर दर्ज करनी पड़ती है और अगर पुलिस ऐसा नहीं करती है तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाता है। सीआरपीसी की धारा 156-(3) में प्रावधान है कि यदि पुलिस तहरीर मिलने पर केस ना लिखें तो कोर्ट उसे F.I.R. लिखने का आदेश दे सकती है। किसी भी व्यक्ति के साथ यदि अन्याय होता है तो आम नागरिक का पुलिस प्रशासन एकमात्र सहारा होता है। ऐसे में यदि पुलिस भी F.I.R. नहीं लिखती है तो ऑनलाइन F.I.R. के साथ ही कोर्ट से एफआईआर लिखवाने का प्रावधान आम नागरिक के पास होता है।

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