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अगर प्यार के एहसास में है आप तो जरूर पढ़ें… LOVE FEELINGS !!

आप किसी से मीलों दूर रह कर भी…उसके धड़कनों को महसूस कर लेते हैं…. तो किसी के साथ रह कर भी उसके साथ को महसूस नही कर पाते…कभी एक फ़ोन कॉल काफ़ी होता है….किसी को अपना मान लेने के लिए….तो कभी ज़िंदगी भर का साथ कम पड़ जाता है किसी रिश्ते को समझने लिए…इन फ़ासलों का भी अपना हिसाब-किताब है…
ख़ैर…. !!

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सारा दिन पूरी दोपहर तमाम रातें तो तुम मेरे साथ साथ रहते हो…
तुम और किसी के भाग्य में अगर आते भी तो कितना आओगे!!

………..

शहर बदल के सोचते हैं,
छिप जाएँगे हम !
सनम बदल के सोचते हैं,
नया प्यार पाएंगे हम !
एहसास बदल के सोचते हैं,
फिर संवर जाएँगे हम !
ये नए दौर की नस्ल है जनाब,
ये जिस्म परख कर इश्क़ करते हैं,
इनसे बराबरी कर पाएंगे हम ?

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मुझसे दामन ना छुड़ा…
मुझको बचा कर रख,
एक रोज़ तुझे मुझसे प्यार भी हो सकता हैं…..

……..

जब तेरी मेरी मुलाकात होगी..
मोहब्बत कि कुछ ऐसी वारदात होगी…
मैं सजद़ा कर लूं तेरे सामने….
तू मेरी मोहब्बत को पढ़ लेना मेरी आंखों में कलमा कि तरह….

……..

ना कबूल कर तू मेरी मोहब्बत!!
ना कबूल हो मुझे तेरी मोहब्बत,,
इस दुनियां के बनाएं रिव़ाजों से,,
ना क़त्ल हो तेरे इश्क का,,
ना क़त्ल हो मेरे इश्क का!!

…………….

जनाब…..मोहब्बत करते हैं, तो खुलकर कीजिए…

नाप-तोल कर तो सरकारी राशन मिला करते हैं…

…………..

कैसे गुज़रती हैं हर शाम मेरी तेरे बगैर,

अगर तुम देख लेते तो,
कभी तन्हा ना छोड़ते मुझे।।

………….

सवालों में सवाल ये भी है,
मुझमें सिर्फ मैं हुँ कि तू भी है !!

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दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को हैं हमसे पर…ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी…

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गुलाब की खुशबू भी फीकी लगती है,
कौन सी खूशबू मुझमें बसा गई हो तुम…
जिंदगी है क्या तेरी चाहत के सिवा…
ये कैसा ख्वाब आंखों में दिखा गई हो तुम…

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तुम ही तो हो,
जो महसूस होते हो
हर लम्हा..

जो तुम न होते
तो शायद…धड़कनें
एक शोर सी लगतीं…!!

…………….

तुम आये हो तो मेरे इश्क़ मे, अब बरकत होने लगी है…
चुपचाप रहता था, दिल मे अब हरकत होने लगी है…

……………

धीरे से लबों पे, पिघला हैं यह सवाल…!!
तू ज्यादा खूबसूरत हैं या तेरा ख़्याल…!!

…………….

तेरे वजूद मे मै काश यूं उतर जाऊं…
तू देखे आइना और मैं,
तुझे नज़र आऊं…

…………….

मेरा अरमान हो तुम,
मोहब्बत से मेरी अनजान हो तुम !
मेरी ख़्वाहिश मेरा अरमान हो तु,
जुदा हो जिस्म से पर मेरी जान हो तुम !!

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कभी देखा है…अंधे को किसी का हाथ पकड़कर चलते हुए…..
हमने मोहब्बत मे…तुम पर यूँ भरोसा किया है….

…………….

बाहों में कुछ इस तरह समेट लो मुझे,
ज़िंदगी के ग़मों का होश न रहे !!

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आओ आज मिल एक सुलह कर
लेते हैं,
तुम दिल रख लो, हम तुम्हें रख लेते हैं…

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पलट पलट तुम याद आजाते हो
क्यों नही तुम लौट आते हो…
माना तुम दूर नही हृदय से
फिर क्यों तुम स्पर्श नही हो पाते हो…

…………….

रिश्ता उन से मेरा इस कदर बढ़ने लगा…
वो मुझे पढ़ने लगे, हम उन्हें लिखने लगे…

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अब टूट गया दिल तो बवाल क्या करना…
ख़ुद ही किया था पसंद अब सवाल क्या करना…

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लोग कहते हैं कि ‘प्रेम’ मैं अच्छा लिखती हूँ… मैं जानती हूँ कि मैं ‘तुम्हें’ लिखती हूँ इसलिए वो अच्छा लगता है…
तुम्हारी नज़रों के छू भर लेने से वो शब्द बदल जाते हैं, उनके मायने बदल जाते हैं….
जानते हो तुम्हारे पढ़ने के बाद उन्हें मैं पढ़ती हूँ तो उसमें मैं नहीं, मेरा लिखा भी नहीं, सिर्फ तुम दिखते हो..
सोचती हूँ कि इन्हें पढ़ते वक़्त तुमने क्या सोचा होगा??…क्या तुम्हारी आँखों के सामने मेरा चेहरा उभरा होगा ??….क्या मेरी आँखों में तुम्हें अपनी परछाईं दिखी होगी जो उग आयी थी उन शब्दों को लिखते वक़्त?…क्या महसूस किया होगा तुमने मेरी इंटेंसिटी को, मेरे दर्द को?..
शायद नहीं! शायद हाँ! क्या पता!!
मेरे लिए मेरा होना भी अब मेरा होना नहीं रहा…
अब मैं बस उतनी ही हूँ जितना तुम में मैं हूँ…

………..

 

बहुत शायरी और कविताएं गुमनाम लेखकों के हैं।

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