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देशव्यापी हड़ताल : केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कामगार संगठनों का हल्ला बोल।

श्रम कानून में प्रस्तावित बदलाव को खत्म करने के साथ ही निजी करण और सरकारी संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर कामगार संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल का आवाहन किया है और सोमवार सुबह से ही मजदूर संगठन पदाधिकारियों ने देश के विभिन्न कोनों में हड़ताल को सफल बनाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। तमाम मांगों के साथ मनरेगा के तहत काम करने वालों के लिए आवंटन अवधि बढ़ाने की मांग भी शामिल है। देश की ऊर्जाधनी कहे जाने वाली मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले और पॉवर हब के नाम से जाने वाले उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में भी हड़ताल का आंशिक असर सुबह से ही दिख रहा है।

देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सुबह से ही डटे संयुक्त मोर्चा पदाधिकारी।

केंद्र सरकार की श्रम कानूनों में बदलाव की नीतियों के खिलाफ मजदूर संगठनों के संयुक्त मोर्चा बैनर तले 28-29 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आवाहन किया है। बैंक संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए दोनों दिन बैंक बंद रखने का निर्णय लिया है। हड़ताल के बीच बैंकों की बंदी के चलते बैंकिंग परिवहन, रेलवे, रक्षा, कोल उत्पादन व बिजली आपूर्ति पर असर पड़ना स्वाभाविक है। वहीं निरंतर बिजली आपूर्ति बहाल करने व राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने सरकार से सभी प्रतिष्ठानों और एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।

देशव्यापी हड़ताल में शामिल मजदूर संगठन-

देशव्यापी हड़ताल में संयुक्त मोर्चे के बैनर तले एचएमएस (HMS), सीटू (CITU), एटक (AITUC), इंटक (INTUC), TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। कोयला, टेलीकॉम, इस्पात, तेल, बैंक, पोस्टल, बीमा आदि क्षेत्रों में सक्रिय मजदूर संगठनों को भी हड़ताल में शामिल होने की अपील की गई है। रेलवे, कोयला और रक्षा क्षेत्र की मजदूर संगठन देशभर में विभिन्न जगहों पर हड़ताल के समर्थन में देशव्यापी बंद का नेतृत्व कर रही हैं।

कोयला उत्पादन के साथ इन क्षेत्रों पर बंद का दिखेगा असर-

देशव्यापी हड़ताल में मजदूर संगठनों की एकजुटता को देखते हुए आकलन लगाया जा रहा है कि कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भारी असर देखने को मिलेगा और साथ ही बिजली उत्पादन क्षेत्र में भी असर पड़ेगा। इसके साथ ही स्टील, तेल, दूरसंचार, पोस्टल, आयकर, बैंक और बीमा क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में भी व्यापक असर दिख सकता है। रेलवे और रक्षा क्षेत्र की मजदूर संगठन ने भी हड़ताल के समर्थन में उतर गई हैं, जिससे आम जनमानस को परेशानी हो सकती है।

करोड़ों मजदूर देशव्यापी हड़ताल में लें रहे हिस्सा – संयुक्त मोर्चा।

देशव्यापी हड़ताल के संयुक्त मोर्चा बैनर तले बयान जारी किया गया है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल के दौरान पूरे भारत में लगभग 20 करोड़ से अधिक औपचारिक व अनौपचारिक मजदूर हड़ताल का समर्थन करेंगे। मनरेगा में अवधी आवंटन की सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीण इलाकों में भी कृषि व अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर भाई हड़ताल में शामिल होंगे। देश के विभिन्न क्षेत्रों की लगभग सभी मजदूर संगठनों ने हड़ताल में शामिल होने का पत्रक दिया है और सुबह से ही सभी मजदूर संगठनों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है।

निजीकरण रोकने की मांग को लेकर बैंकों ने हड़ताल को दिया समर्थन-अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (AIBA) ने भी सरकारी बैंकों के निजीकरण रोकने की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है। बैंकों से लिए कर्ज कि शीघ्र वसूली, बैंकों द्वारा उच्च जमा दर, उपभोक्ताओं पर निम्न सेवा शुल्क और बैंक कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग का समर्थन करते हुए बैंक संगठनों ने भी देशव्यापी हड़ताल के साथ खड़े होने का फैसला किया है।

एनसीएल मजदूर संगठन संयुक्त मोर्चा सुबह से ही मुस्तैद-

एनसीएल दुद्धीचुआ क्षेत्र रेलवे ट्रैक को रोकते कामगार संगठन के लोग।

कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड के मजदूर संगठनों ने भी देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सोमवार सुबह से ही मोर्चा संभाल लिया है और कोयला खदान जाने वाले मुख्य मार्गों पर मजदूरों से हड़ताल को सफल बनाने के लिए निवेदन करते दिख रहे हैं। हड़ताल के बीच मजदूर संगठन पदाधिकारियों ने रेलवे कोल डिस्पैच को भी है लगभग पूरी तरह रोक दिया है।

कर्मचारियों का काम पर आना जरूरी नहीं तो कटेगा वेतन-

मजदूर संगठन संयुक्त मोर्चा तले 28-29 मार्च को जारी देशव्यापी हड़ताल के बीच सरकारी कंपनियों ने साफ-साफ कहा है कि दोनों दिन सरकारी कर्मचारियों की दफ्तर में उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए नहीं तो काम पर नहीं आने वाले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनका 2 दिन का वेतन भी कट जाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर कर्मचारियों को कोई आकस्मिक अवकाश इस दौरान नहीं दिए जाएंगे। देश के कुछ हिस्सों में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लागू करने की धमकी के बावजूद रोडवेज परिवहन और बिजली विभाग के कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। बैंकिंग और बीमा समेत वित्तीय क्षेत्र के मजदूर संगठन भी देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं।

 

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