कविता/शायरी

नजरें जब मिली थी मुस्करायी तुम भी थी… LOVE FEELINGS

आओ बैठो करीब मेरेे
कुछ तो बात कर लो..
मैं हूँ ख़ामोश गर तो
तुम ही शुरुआत कर लो….

अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में ,
नजरें जब मिली थी मुस्करायी तुम भी थी…

निगाह हर तरफ़ ढूँढने लगी है
तुम कहाँ छुप गये हो
धड़कन पूछने लगी है…

तुम नजरअंदाज करके थक
जाओगे…
हम नज़रों में बसाकर इंतजार
करेंगे…..

एक अजीब सा फासला है मेरे और उसके दरमियां…
रोज़ देख भी लेते है और मुलाकात भी नही होती…

अच्छे रिश्तों को वादों और शर्तों की जरुरत नहीं है,
उसके लिए दो खुबसूरत दिल चाहिए,
एक भरोसा कर सके और दूसरा उसे समझ सके…

“रुबरु होना ज़रूरी तो नहीं तुम्हारा…
मेरे रूह के हकदार बन बैठे हो…
जहीर-ए-मोहब्बत अब जरूरी तो नहीं…
मेरे इश्क़ के दावेदार बन बैठे हो”…

किन लफ्जों में लिखूँ मैं अपने इंतज़ार को तुम्हें…
बेजुबां है इश्क़ मेरा…
ढूंढ़ता है खामोशी से तुझे…

प्रिय लिखकर नीचे लिख दूं नाम तुम्हारा,
कुछ जगह बीच में छोड़कर,
नीचे लिख दूं सदा तुम्हारा…
लिखा बीच में क्या? यह तुमको पढ़ना है, कागज पर मन की भाषा का अर्थ समझना है…जो भी अर्थ निकालोगी तुम वो मुझको स्वीकार…झुके नैन, मौन अधर या कोरा कागज, अर्थ सभी का प्यार…   …

कुछ इस कदर
दुआओं में माँगा है उन्हें,
कि एक भी दुआ कबूल हुई ,
तो वो मेरे हो जायेगें ।

अगर तुम प्रतीक्षा नहीं कर सकते,
तो फिर प्रेम तुम्हारे वश का नहीं!!

घाट-ए-शाम हो कभी संग तुम्हारे,,
मैं अपना सर रख जाऊं कन्धे पर तुम्हारे,
तुम लहरों कि तरह छू जाओ मुझे,
मैं पानी कि तरह बह जाऊं संग तुम्हारे…

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