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Ukraine से MBBS की पढ़ाई क्यों करते हैं Indian Students?

जानिए विदेश से पढ़ाई करने की मुख्य वजह?

रूस और यूक्रेन में जारी जंग (Russia Ukraine War) ने विश्व के सभी देशों के लिए चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। जिस तरह से देश एक दूसरे को लड़ाई में समर्थन कर रहे हैं उससे तो तीसरे विश्वयुद्ध की खतरा गहराने लगा है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण जंग में भारत देशवासियों को मेडिकल की पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों की सकुशल वतन वापसी की चिंता सता रही है। भारत सरकार (India) और यूक्रेन (Ukraine) में फंसे छात्रों के परिवारीजन दिनभर इसी जुगत में लगे हुए हैं कि किस तरह से तनावग्रस्त इलाके से भारतीय छात्रों को सकुशल बाहर निकाला जाए। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उच्च स्तरीय आपात बैठक कर भारत सरकार के दो मंत्रियों किरण रिजिजू व ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूक्रेन के पड़ोसी देश में भेजने का फैसला लिया है, जिसे यूक्रेन में भारतीय छात्रों और नागरिकों की सकुशल वापसी में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो।

यूक्रेन में करीब 18095 भारतीय छात्र फंसे हुए थे जिनमें से कुछ तनाव के दौरान ही युद्ध से पहले वतन वापसी कर गए हैं और तकरीबन 2000 छात्रों को एयर इंडिया की मदद से ऑपरेशन गंगा (Operation Ganga) के तहत एअरलिफ्ट (Airlift) कर भारत लाया जा चुका है। अभी भी यूक्रेन में लगभग 13000 भारतीय छात्र और नागरिक फंसे हुए हैं, जिन्हें सकुशल निकालने के लिए युद्ध स्तर पर भारत सरकार द्वारा प्रयास जारी है। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों में से अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए गए हुए हैं। भारतीय छात्र डॉक्टर का सपना पूरा करने के लिए यूक्रेन में बड़ी तादाद में पढ़ाई के लिए जाते हैं। भारतीय छात्रों के यूक्रेन में इतनी बड़ी संख्या में पढ़ने की वजह जानना भी महत्वपूर्ण है।

यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई बहुत सस्ती व सुविधाजनक है। जबकि भारत में जनसंख्या के अनुपात के आधार पर मेडिकल शिक्षा के पर्याप्त संसाधन की कमी है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय स्टूडेंट डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जैसे देशों में पहुंचते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यूक्रेन में मेडिकल पढ़ाई का खर्चा भारत के निजी कॉलेजों की अपेक्षा आधे से भी कम है। यूक्रेन में 5 साल की मेडिकल पढ़ाई का खर्च तकरीबन 25 लाख रुपए तक पड़ता है जो भारत के प्राइवेट कालेजों में तकरीबन 75 लाख तक हो सकता है। भारत में मेडिकल प्रवेश पाने के लिए आवेदक उम्मीदवारों की संख्या के मुकाबले पढ़ाई करने की सीट बहुत कम है। नीट की परीक्षा में लाखों छात्र इस उम्मीद से बैठते हैं कि उन्हें सरकारी कॉलेज में दाखिला मिल सके लेकिन मात्र 10 फ़ीसदी उम्मीदवारों को ही सरकारी कॉलेजों में एडमिशन मिल पाता है क्योंकि भारत में एमबीबीएस की मात्र 88000 सीट है। वहीं वीडियोस की महज 27000 सीटें हैं। एक आंकड़ा के अनुसार 2021 में करीब 8 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा में आवेदन किया था और इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि तकरीबन 7 लाख छात्रों को दाखिला नहीं मिल पाया होगा।

यूक्रेन से एमबीबीएस बीडीएस की पढ़ाई करने के लिए अलग से कोई प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाती और ना ही कोई डोनेशन देने पड़ते हैं। यूक्रेन में मेडिकल में प्रवेश के लिए साल में दो बार सितंबर और जनवरी में प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित की जाती है और यदि कोई भारतीय छात्र सिर्फ नीट परीक्षा (NEET Exam) में ही क्वालीफाई कर लेता है तो यूक्रेन में आसानी से एमबीबीएस में एडमिशन हो जाता है, नीट में कोई रैंक मायने नहीं रखती है। जो छात्र भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा के बाद एडमिशन से वंचित रह जाते हैं वैसे छात्र यूक्रेन के कॉलेजों में एडमिशन ले लेते हैं और पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में प्रैक्टिस करने के लिए एफएमजीई परीक्षा (Exam) पास करनी होती है। यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने का एक फायदा यह भी है कि यहां की डिग्री की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता है।

विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर भारत में प्रैक्टिस करने के लिए एफएमजीई (FMGE) की परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। और आंकड़े बताते हैं कि विदेश से पढ़कर लौटने वाले करीब 4000 मेडिकल छात्रों में से सिर्फ 700 छात्र ही इस परीक्षा में सफल हो पाते हैं। लेकिन फिर भी डॉक्टर बनने का सपना पाले भारतीय छात्र यूक्रेन की ओर बड़ी संख्या में रुख करते हैं। वर्ल्ड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती शिक्षा मुख्य वजह हैं।

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