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कल कारखानों की भरमार पर रोजगार की दरकार।

रोजगार की कमी से युवा पलायन को मजबूर।

शक्तिनगर। सोनभद्र जिले के दुद्धी विधानसभा क्षेत्र में रिहंद डैम के किनारे बसा ऊर्जांचल परीक्षेत्र जहां एनटीपीसी, हिंडालको, एनसीएल, लैंको व अनपरा बोर्ड सरीखे कल कारखाने लगे तो विस्थापित व स्थानीय जनता में आस जगी की हर हाथ को काम मिलेगा और क्षेत्र का विकास होगा। समय बीतने के साथ कल कारखाने तो फल और फूले लेकिन स्थानीय जनता के रोजगार के सवाल जस के तस बने रहे। ऊर्जाजल के औद्योगिक इकाइयों में संविदा की नौकरी के लिए भी विस्थापित व स्थानीय जनता के लिए कोई आरक्षण का मापदंड निर्धारित नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर स्थानीय युवा पलायन को मजबूर है और बड़ी आबादी बेरोजगार है। वहीं गैर जनपद व प्रदेश के युवाओं को जुगाड़ तकनीक से एनसीएल आउटसोर्सिंग कंपनियों में समाहित करने का खेल रचा जा रहा है। जिस कारण नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खेल हो रहा है।

ऊर्जांचल की जनता का कहना है कि कितने जनप्रतिनिधि आए और गए लेकिन रोजगार के सवाल पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हर चुनाव में वोट मांगने के लिए नेता दरवाजे पर आते हैं लेकिन युवाओं के रोजगार पर ध्यान देने के बजाय जीतने के बाद क्षेत्र से मुंह मोड़ लेते हैं।

चिल्काडाँड़ बीडीसी रंजीत कुशवाहा ने बताया कि जिन विस्थापितों की जमीनों पर प्लांट और खदान लगी है, उन्हें एक बार तो मुआवजा और नौकरी मिल गई। लेकिन उनकी आने वाली पीढ़ियां बेरोजगारी का दंश झेल रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधि को चाहिए कि कंपनियों से वार्ता कर विस्थापितों के संविदा रोजगार के लिए एक ठोस नीति तैयार कर अस्थाई तौर पर कोटा का निर्धारण किया जाए।

युवा छात्र नेता मुकेश सिंह ने कहा कि जनता को शिक्षित व सुलभ जनप्रतिनिधि का चयन करना चाहिए, जो युवाओं के हित व रोजगार के संबंध में विशेष ध्यान दें और कंपनियों से वार्ता कर रोजगार हेतु एक विशेष नीति का निर्माण करा सके।

अंबेडकर नगर ग्राम पंचायत सदस्य सुरेश गुप्ता ने कहा कि एनसीएल प्रबंधन को एनटीपीसी प्रबंधन से सीख लेते हुए ऐसी नीति का निर्माण करना चाहिए जिससे आउटसोर्सिंग कार्यों में लगी कंपनी बदले लेकिन कंपनी में कार्यरत श्रमिक की छटनी ना की जाए।

युवा नेता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि कंपनियों को विस्थापित व स्थानीय प्रभावितों को वरीयता देते हुए रोजगार व ठेकेदारी के अवसर देने की निर्धारण हो और स्वरोजगार के प्रशिक्षण देकर व्यापार करने हेतु कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। जिससे स्थानीय युवाओं के पलायन पर अंकुश लगाया जा सके और स्वरोजगार विकसित होगा तो कई हाथों को काम मिलेगा।

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