FEATUREDउत्तर प्रदेशभारतराजनीतिविधानसभा चुनावसोनभद्र

यूपी की आखिरी विधानसभा सीट दुद्धी से जुड़ी हर अपडेट : UP ASSEMBLY ELECTION 2022

2017 में दुद्धी विधानसभा सीट पर भाजपा गठबंधन अपना दल (एस) ने जीत दर्ज की थी और कद्दावर आदिवासी नेता विजय सिंह गौड़ को हार का मुंह देखना पड़ा था।

सोनभद्र। सुबे की आखिरी विधानसभा सीट दुद्धी पर मतदान अंतिम चरण (07 March) में होना है और राजनीतिक पार्टियां जातीय समीकरण के अनुसार अपने बिसात बिछाने शुरू कर दिए हैं। इस विधानसभा सीट पर नेताओं का पार्टी बदलकर चुनाव लड़ने की परंपरा देखने को मिलती है। इस बार के चुनाव में वर्तमान अपना दल (एस) (Apna Dal) विधायक हरिराम चेरो ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दामन थाम लिया है और हाथी पर सवार होकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। वहीं पिछले चुनाव में बसपा से लड़े विजय सिंह गौड़ ने वनवास खत्म करते हुए समाजवादी पार्टी (SP) में वापसी कर लिया है और “22 में बाइसिकल” पर भरोसा जताते हुए जनता से समर्थन मांग रहे हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में दुद्धी विधानसभा सीट भाजपा (BJP) की सहयोगी दल अपना दल (एस) के पाले में थी परंतु इस बार भाजपा ने स्वयं अपना प्रत्याशी राम दुलारे गौड़ को मैदान में उतारा है। राम दुलारे गौड़ को योगी-मोदी के किए कार्यों पर भरोसा है। तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने पूर्व सांसद स्व रामप्यारे पनिका की पत्नी बसंती पनिका को उम्मीदवार बनाया है। सोनभद्र को जिला बनाने में विशेष भूमिका निभाने वाले रामप्यारे पनिका के पत्नी के नाम पर कांग्रेस इस बार चुनाव मैदान में है। दुद्धी विधानसभा की सीट पर चुनावी इतिहास में जनता ने सबसे ज्यादा विश्वास विजय सिंह गौड़ पर जताया है और माना जाता है कि समय-समय पर विजय सिंह गौड़ ने पार्टी तो बदला लेकिन जनता का उन पर विश्वास कम नहीं हुआ। पर सारे मिथकों को तोड़ते हुए 2017 विधानसभा चुनाव में अजेय माने जाने वाले कद्दावर आदिवासी नेता विजय सिंह गौड़ को हरिराम चेरो ने 1085 मतों से शिकस्त दी थी।

दुद्धी विधानसभा सीट का जातीय समीकरण :-

उत्तर प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट (Duddhi Assembly Seat) पर जातीय समीकरण का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि यहां सबसे अधिक गौड़ जाति के 48 हजार मतदाता हैं, इसके बाद खरवार जाति के 25 हजार, चेरो जाति 10 हजार, अगरिया 09 हजार, दलित 35 हजार, वैश्य 30 हजार, ब्राह्मण 18 हजार, यादव 17 हजार, अल्पसंख्यक 18 हजार, बिंद 14 हजार, बैसवार 14 हजार, कनौजिया 13 हजार, धरिकार 12 हजार, घटिया और छत्रिय मतदाताओं की संख्या 09 हजार, विश्वकर्मा 05 हजार, कायस्थ 05 हजार और पाल मतदाताओं की संख्या 04 हजार है।

दुद्धी विधानसभा क्षेत्र की समस्या :-

दुद्धी विधानसभा (Duddhi Assembly Seat) क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के आय के सीमित साधन हैं। शिक्षा और जागरूकता के अभाव में आदिवासियों को अक्सर ठगी का शिकार होना पड़ता है। दूधी के धौरा में गोंद बहुतायत में पाया जाता है, जिस की मार्केट में कीमत बड़ी है लेकिन पेंट कंपनियां बेहद कम दामों में आदिवासियों से खरीद लेती हैं। क्षेत्र में तेंदू के जंगल बड़े भू-भाग में फैले हुए हैं और कुछ समय के लिए तेंदू पत्ते की तुड़ाई से आदिवासियों को कुछ कमाई हो जाती है। सुदूर आदिवासी अंचलों में पेयजल की समस्या रहती है और गर्मियों के दिनों में चुहाड़ से पानी पीना व पानी के लिए लंबी दूरी तय करना विकराल समस्या है। रोजगार के अभाव में युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन और समय-समय पर औद्योगिक इकाई लगने के कारण विस्थापन बड़ी समस्या है। कनहर सिंचाई परियोजना के कारण बड़ी आबादी विस्थापित होगी लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विस्थापित मुआवजा भी उचित नहीं मिला।

विजय सिंह गौड़ का दबदबा दशकों तक कायम रहा :-

1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ कर विजय का स्वाद चखे विजय सिंह गौड़ ने अपने राजनीतिक सफर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और देश के कद्दावर आदिवासी नेताओं में विजय सिंह का नाम शुमार किया जाता है। आदिवासी हितों की लड़ाई करने हेतु विजय सिंह गोंड़ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी नेता के रूप में की जाती है। हालांकि यह चर्चा भी आम रहती है कि अपने लंबे राजनीतिक सफर में विजय सिंह गोंड़ ने कई राजनीतिक पार्टियों की अदला-बदली की लेकिन उनके समर्थक उनके साथ हमेशा बनी रहे। दुद्धी विधानसभा क्षेत्र में गोंड़ मतदाताओं की संख्या बहुलता में है और गोंड़ मतदाताओं के वोट निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। 1980 में कांग्रेस पार्टी (Congress) का टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले विजय सिंह गौड़ ने 1985 व 1989 में भी कांग्रेस पार्टी से विजयी हुए। इसके बाद 1991 और 1993 में जनता दल (Janta Dal) का दामन थामा व भारी मतों से जीत दर्ज किया। वहीं 1996 और 2002 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर फिर विधायक निर्वाचित हुए। 2003 की मुलायम सिंह सरकार ने विजय सिंह गौड़ ने मंत्री पद भी संभाला।

अजेय विजय सिंह गोंड़ 2017 में हुए पराजित :-

2017 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी से किस्मत आजमा रहे विजय सिंह गोंड़ (Vijay Singh Gond) को भाजपा सहयोगी दल अपना दल (एस) के हरिराम चेरो (Hari Ram Chero) ने बेहद कम मतों के अंतर से हराकर जीत के विजय रथ को रोक दिया। हरिराम चेरो को 64399 मत मिले तो वहीं विजय सिंह गोंड़ को 63314 मत प्राप्त हुए।

2022 विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर :-

सोनभद्र जनपद में अंतिम चरण 7 मार्च को वोट डाले जाएंगे और दुद्धी विधानसभा सीट पर प्रमुख चारों राजनीतिक पार्टियों ने अपने मजबूत उम्मीदवार खड़े किए हैं और माना जा रहा है कि कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। चट्टी चौराहों पर चुनावी चकल्लस के बीच हर पार्टी का कार्यकर्ता अपने नेता को भारी मतों से जीता हुआ बता रहा है लेकिन 10 मार्च (10 March) को जब मतों की गिनती होगी तो पता चलेगा कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा और जमानत किसकी जप्त होगी?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button