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हवा में उड़ रहा राख ही राख, शुद्ध हवा को तरस रहे इंसान।

शक्तिनगर। एनटीपीसी सिंगरौली की शक्तिनगर इकाई की चिमनियों से सीधा राख उड़ने से रहवासी इलाकों व जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की शिकायत कोटा रहवासी आशीष चौबे ने आईजीआरएस के माध्यम से बुधवार को दर्ज कराई। जिसके बाद उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सोनभद्र क्षेत्रीय कार्यालय अधिकारी डॉ टीएन सिंह ने एनटीपीसी शक्तिनगर प्रबंधन को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि बॉयलर से जनित फ्लाईऐश के नियंत्रण हेतु स्थापित ईएसपी का संचालन व रखरखाव प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करते हुए स्टैक ईमीशन रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर क्षेत्रीय कार्यालय में प्रेषित करें जिससे कि प्लांट के आसपास के क्षेत्र में फ्लाईऐश से जन स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव ना पड़े इसकी पुष्टि की जा सके। यदि समय रहते रिपोर्ट प्रेषित नहीं होती है तो एनटीपीसी प्रबंधन पर उचित कार्यवाही की जाएगी।

एनटीपीसी की चिमनी से उड़ रहा राख, प्रदूषण से रहवासी परेशान।

कोटा क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रीतम कुमार व क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि अमित कुमार ने बताया कि एनटीपीसी पावर प्लांट लगने से क्षेत्र में बिजली आई और विकास के कई कार्य हुए लेकिन प्लांट की राख ने ऊर्जांचल के निवासियों की शुद्ध हवा में सांस लेने के अधिकार को छीन लिया। बुधवार को दोपहर में एनटीपीसी पावर प्लांट के आसपास के क्षेत्रों में लोगों के कपड़ों व बालों पर चीमनियों से उड़ने वाली कोयले की राख साफ-साफ दिखाई दिए। जो स्वास्थ्य व प्रदूषण की दृष्टि से भयावह व चिंताजनक है। मकानों की छतों पर राख की परत जमी दिखी। चिमनियों से निकलने वाली राख ने एनटीपीसी पावर प्लांट के आसपास बसे क्षेत्रों में आम जनमानस का जीवन नारकीय बना दिया है। क्षेत्र में टीबी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी चिंता की लकीरों को और बड़ी कर देती है।

कोटा बस्ती के एक रहवासी के जैकेट पर हवा में उड़ती धूल की फोटो।

बिजली घरों से निकलने वाली कोयले की राख के निपटान की समस्या सबसे बड़ी है। नदी तालाबों के किनारे फ्लाईऐश डैम बनाने से जलाशयों का पानी भी जहरीला हो रहा है और इसकी चपेट में आकर कई लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बड़े-बड़े बांध के बीच फ्लाईऐश को एकत्र किया जाता है और निविदा निकाल विभिन्न जगहों पर रोड ट्रांसपोर्ट के जरिए निपटान के लिए भेजा जाता है परंतु खुली गाड़ियों में भेजने के कारण पावर प्लांट के क्षेत्र से लेकर राख पहुंचने के स्थान तक सड़क पर उड़ती कोयले की राख से वातावरण प्रदूषित बहुत जहरीला नजर आता है। बंद गाड़ियों से फ्लाईऐश परिवहन के एनजीटी के आदेशों को ताक पर रखकर राख ट्रांसपोर्टेशन बड़े पैमाने पर कराने का खेल हो रहा है।

एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र-सिंगरौली जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हवा, पानी, मिट्टी ही नहीं, यहां रहने वाले अधिकतर इंसानों के खून के नमूनों में भी पारा (मरकरी) की अधिकता पाया है। यहां के पानी में फ्लोराइड है, जो सीधे शरीर की हड्डियों पर वार करता है और फ्लोराइड से एक बार हड्डी बेकार हो जाए तो इसका कोई इलाज संभव नहीं है। गंभीर समस्या यह है कि उर्जान्चल में पीने का साफ पानी उपलब्ध ही नहीं है। क्षेत्र में बढ़ता प्रदूषण लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर रहा है। एनटीपीसी की चिमनियों से निकलने वाली कोयले की राख व कोयला परिवहन की गाड़ियों से उड़ती कोयले की धूल क्षेत्र में प्रदूषण की मुख्य वजह है।

प्रदूषण और जहरीली हवा के बीच दम तोड़ती जिंदगी की परवाह किए बगैर चमकते भारत के लिए बिजली उत्पादन किया जा रहा है और चमचमाती रोशनी से दूर इन पावर प्लांटों के आसपास रहवासी इलाकों में उड़ने वाली कोयले की राख से पानी को ज़हरीला बना रही हैं और आम जनमानस की जिंदगी में अंधेरा घोल रही है।

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