सोनभद्र

तुम फतवे जारी करते हो, हम दस्ते-दुआ फैलाते हैं-योगेंद्र मिश्र।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दीपोत्सव एवं काव्य संध्या आयोजित

शक्तिनगर। सांस्कृतिक समिति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, एनटीपीसी शक्तिनगर परिसर एवं साहित्यिक-सामाजिक संस्था सोन संगम के संयुक्त तत्वावधान में देव दीपावली, स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव, गुरुनानक जयंती एवं रानी लक्ष्मीबाई जयंती के पावन अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी शक्तिनगर परिसर में शुक्रवार सायं को भव्य दीपोत्सव, विचारगोष्ठी एवं काव्य संध्या का आयोजन शक्तिनगर थाना प्रभारी निरीक्षक मिथलेश कुमार मिश्र के मुख्य आतिथ्य एवं एनटीपीसी अपर महाप्रबन्धक विनय कुमार अवस्थी की अध्यक्षता में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया गया। जिसमें समूचे विद्यापीठ परिसर में संस्था के प्राध्यापकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं एवं आमंत्रित अतिथियों द्वारा सैकड़ों दीप जलाये गये। अतिथियों का स्वागत डॉ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विचारगोष्ठी एवं काव्य संध्या आयोजित की गयी। विचारगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय विद्यालय शक्तिनगर प्राचार्य रविंद्र राम द्वारा भारत की संत परम्परा में गुरुनानक देव के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करते हुए उनकी शिक्षाओं को सूची मानवता के लिए अनुकरणीय बताया गया। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई सहित भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अल्पज्ञात नायकों का भी पुण्य स्मरण किया। मुख्य अतिथि मिथिलेश मिश्र ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए आजादी के नायकों के समुचित सम्मान की आवश्यकता को रेखांकित किया।

काव्य संध्या में कवि माहिर मिर्जापुरी ने ‘जाने कितने बलिदानों से, आजादी हमने पायी थी’ गीत से अमर स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। बहर बनारसी ने ‘कृष्ण और सुदामा की दोस्ती नहीं मिलती’ गजल से कौमी एकता को स्वर दिया। एनटीपीसी शक्तिनगर के राजभाषा अधिकारी ओमप्रकाश ने ‘किसान की पीठ सियासत की सड़क है’ कविता से राजनीति की विडम्बनाओं को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनय कुमार अवस्थी की कविता ‘एक धर्म हो, एक जाति हो, एक ध्येय सबके जीवन का’ ने भारतीय संस्कृति का विराट चित्र खींचा। रमाकान्त पाण्डेय ने ‘किसी को रूप, धन, बल का, किसी को ज्ञान का अहं’ कविता से जीवन में विनय एवं शील के महत्व को प्रतिपादित किया। योगेन्द्र मिश्र ने ‘तुम फतवे जारी करते हो, हम दस्ते-दुआ फैलाते हैं’ गजल से एक आम हिन्दुस्तानी के देशप्रेम का चित्रण किया। काव्य संध्या में श्रोताओं ने एक से बढ़कर एक कविताओं का रसास्वादन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने किया। उक्त अवसर पर आरके राम, बलवंत सिंह, सुरेन्द्र दुबे, डॉ0 अपर्णा त्रिपाठी, डॉ0 छोटेलाल जायसवाल, उदय नारायण पाण्डेय, डॉ0 ओमप्रकाश यादव, डॉ0 रणवीर सिंह, बद्री प्रसाद, श्रवण कुमार, रीता पाण्डेय, सौम्या, रामजनम, अच्छेलाल, खुशबू खातून, संजना, अक्षय, अम्बरीश सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। उमेश चन्द्र जायसवाल के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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